नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने तबलीगी जमात के मामले पर राज्यसभा में जवाब दिया। गृह मंत्रालय ने लिखित जवाब में कहा कि बिना मास्क, सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी का पालन किए भीड़ लंबी अवधि के लिए बंद परिसर में इकट्ठा हुई, जिसके कारण कई लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल गया। जवाब में कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने जमात के 233 लोगों को गिरफ्तार किया है और फिलहाल मौलाना साद के बारे में जांच जारी है।
बता दें कि मार्च महीने के आखिरी दिनों में निजामुद्दीन मरकज में हजारों तबलीगी जमात के लोग इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद इन सदस्यों को वहां से निकाला गया था। उस दौरान तबलीगी जमात के लोग यहां से निकलकर देश के कई हिस्सों में भी गए थे। आरोप लगा था कि दुनिया भर से हजारों की संख्या में निजामुद्दीन मरकज में आए जमातियों ने यहां से निकल कर देशभर में कोरोना वायरस फैलाया। मौलाना साद तबलीगी जमात का नेता है।
मुस्लिम स्कॉलर और रिसर्चर अतीक उर रहमान के अनुसार, तबलीग समाज की स्थापना आजादी के आंदोलन के दौरान हुई थी। करीबन 150 मिलियन से ज्यादा इनके फॉलोवर दुनियाभर में हैं। ये सुन्नी समाज के मुस्लिमों में मुस्लिम धर्म के प्रचार का काम करते हैं लेकिन इनके कोई रजिस्टर परमानेंट मेंबर्स नहीं होते हैं। ये शहर-शहर जाकर मरकज मस्जिदों में लोकल लोगों को बुलाकर धर्म का प्रचार करते हैं।
यह जमात इस्लाम के बेसिक को फॉलो करती है और उसका प्रचार करती है। ये ऐशो आराम की जीवन शैली और विज्ञानवादी सोच नहीं रखते, जिसके कारण मुस्लिम स्कॉलर और पढ़े-लिखे विद्वान इनके विचारों से सहमत नहीं होते हैं। साउथ ईस्ट एशिया में इनके ज्यादा सेंटर और फॉलोवर्स हैं। मौलाना साद का इस तबलीगी जमात से गहरा नाता है। मौलाना साद के परदादा मौलाना इलियास कांधलवी ने ही 1927 में तबलीगी जमात का गठन किया था।

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