संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन कई सांसद कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। देशभर से सांसद सत्र में भाग ले रहे हैं लेकिन इस बार सत्र में भाग लेने से पहले सांसदों का कोरोना का कोरोना टेस्ट जरूरी है और अबतक हुए टेस्ट में कुल 17 सांसद कोरोना पाजिटिव मिले हैं। कुल 17 सांसदों में 12 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं और 5 अन्य दलों के हैं। इन सभी सांसदों का टेस्ट संसद भवन परिसर में ही हुआ है।
भारतीय जनता पार्टी के जो सांसद पॉजिटिव निकले हैं उनके नाम इस तरह से हैं, मिनाक्षी लेखी, सुखबीर सिंह जौनपुरिया, सुकांता मजूमदार, अनंत कुमार हेगड़े, जनार्दन सिंह सिगरीवाल, बिद्युत बारान महतो, प्रधान बरुआ, प्रताप राव पाटिल, राम शंकर कटारिया, प्रवेश बर्मा, सत्यपाल सिंह और रोडमल नागर हैं।
इनके अलावा राजस्थान से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल, आंध्र प्रदेश से YRSC सांसद गोड्ड़ेती माधवी, महाराष्ट्र से शिवसेना सांसद प्रताप राव जाधव, आंध्र प्रदेश से YRSC सांसद एन रेडप्पा, और तमिलनाडू से डीएमके सांसद सेलवम जी की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव निकली है।
सत्र के प्रारंभ से पहले सांसदों और संसद कर्मचारियों समेत 4,000 से अधिक लोगों की कोविड-19 के लिए जांच कराई गयी है। इस बार ज्यादातर संसदीय कामकाज डिजिटल तरीके से होगा और पूरे परिसर को संक्रमणुक्त बनाने के साथ ही दरवाजों को स्पर्शमुक्त बनाया जाएगा। इस बार सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों के तहत सांसदों के लिए विशेष बैठक व्यवस्था की गयी है।
सत्र के पहले दिन को छोड़कर बाकी दिन राज्यसभा की कार्यवाही सुबह की पाली में नौ बजे से दोपहर एक बजे तक संचालित होगी, वहीं लोकसभा अपराह्न तीन बजे से शाम सात बजे तक बैठेगी। दोनों सदनों के चैंबरों और गैलरियों का इस्तेमाल दोनों पाली में सदस्यों के बैठने के लिए किया जाएगा। दोनों पालियों के बीच पूरे परिसर को संक्रमण मुक्त किया जाएगा।
पूरे संसद परिसर को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सुरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, आईसीएमआर और डीआरडीओ के अधिकारियों के साथ श्रृंखलाबद्ध बैठकें कीं।
मॉनसून सत्र के 14 सितंबर से एक अक्टूबर तक आयोजन के दौरान तय मानक परिचालन प्रक्रियाओं के अनुसार सांसदों, दोनों सदनों के सचिवालयों के कर्मियों तथा कार्यवाही कवर करने वाले मीडियाकर्मियों को कोविड-19 की जांच कराने को कहा गया है और यह जांच सत्र शुरू होने से 72 घंटे से अधिक पहले नहीं होनी चाहिए।

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