• जिले में मरीजों और कोरोना वरियर्स को भोजन उपलब्ध कराने में हुए ‘घोटाला’
जिले में डीएम और सीएमओ में अब धीरे-धीरे तकरार बढ़ गई है। एक तरफ जहां डीएम वैभव श्रीवास्तव के पक्ष में जिले की पूर्व डीएम शुभ्रा सक्सेना आ गई है तो वहीं सीएमओ के पक्ष में यूपी का पीसीएस संघ आ गया है। पीसीएस संघ ने सीएम को पत्र लिखकर डीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ ने डीएम वैभव श्रीवास्तव के पूर्व मामलों से भी सीएम को अगवत कराया है। वहीं, पूर्व डीएम शुभ्रा सक्सेना ने आज कहा कि हमने सीएमओ के कार्यों पर असंतुष्ट व्यक्त करते हुए कई बार चेतावनी पत्र जारी किया था, लेकिन सीएमओ ने अपनी आदतों में सुधार नहीं किया। फिलहाल इस मामले का पटाक्षेप करने के लिए कमिश्नर मुकेश मेश्राम भी जिले में आ चुके हैं। वहीं, इस मामले को लेकर पीएमएस संघ पहले ही डीएम के खिलाफ कारईवाई की मांग कर चुका है।

ऐसा कहा जा रहा है कि सीएमओ डॉ संजय शर्मा कोरोना संक्रमितों और डॉक्‍टर व अन्‍य मेडिकल स्‍टॉफ के जीवन से खिलवाड़ कर रहे थे। पूर्व जिलाधिकारी शुभ्रा सक्‍सेना ने भी सीएमओ को चेतावनी पत्र जारी किए हैं। उनके गैरजिम्‍मेदाराना कामकाज के तरीके से परेशान होकर उन्‍होंने शासन को पत्र भी भेजा था। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए भी प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर उन्होंने कई बार आदेश दिया। पूर्व जिलाधिकारी शुभ्रा सक्‍सेना ने प्रमुख सचिव स्‍वास्‍थ्‍य को 27 अप्रैल 2020 को पत्र लिखकर सीएमओ का कच्‍चा-चिठठा खोल दिया है। इसमें उन्होंने कांटेक्‍ट ट्रेसिंग से लेकर कोरेंटाइन सेंटर में रखे गए लोगों के भोजन की व्‍यवस्‍था, सेनीटाइजेशन सभी मोर्चे पर सीएमओ फेल दिखाई दिए।

अधिकारी संघ ने की कार्रवाई की मांग
उत्तर प्रदेश अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने सीएम को पत्र लिखकर डीएम रायबरेली वैभव श्रीवास्तव ने खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि रायबरेली के डीएम पूर्व में भी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपमान जनक बात करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएम वैभव श्रीवास्तव मऊ जिले में तैनाती के दौरान में कर्मचारियों का अपमान कर चुके हैं। रायबरेली में सीएमओ के हुए अपमान पर उन्होंने महानिदेशक को पत्र लिखकर अवगत भी कराया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में अगर आपकी तरफ से कार्रवाई की जाएगी तो संगठन आपका बहुत आभार रहेगा।
नहीं मिल रहा सही भोजन
रायबरेली जिले के क्वारटाइन सेंटर का बहुत ही बुरा हाल रहा है। सीएमओ मरीजों को सही तरह से भोजन भी नहीं उपलब्ध करा पाए हैं, जिसकी वजह से कई बार रेयान स्कूल में हंगामा भी चुका है। कोरोना संक्रमित मरीजों का कहना है कि जिस तरह की व्यवस्था यहां पर उपलब्ध कराई जा रही थी, उससे कहीं अच्छा हमारा घर ही था। सरकार ने भी तमाम आवश्‍यक उपकरण व चिकित्‍सकीय सामानों की स्‍थानीय स्‍तर पर खरीद की छूट दे रखी है वहीं रायबरेली के सीएमओ इस सबमें भी गड़बड़ी करते दिखाई दे रहे हैं। वह बेहतर तरह से व्यवस्था नहीं करा पाए व्यवस्था।
ऐसा कहा जा रहा है कि चिकित्सा विभाग को एक करोड़ बीस लाख का बजट उपलब्‍ध कराने के बावजूद भी पीपीई किट, ट्रिपल लेयर मास्‍क, एन-95 मास्‍क, ग्‍लब्‍स, शूकवर, ऑक्‍सीजन सिलेंडर की अत्‍याधिक कमी अभी भी बनी हुई जिससे चिकित्‍सकीय स्‍टाफ को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, एल-1 फैसिलिटी सेंटर का निरीक्षण किया तो चिकित्‍सकों की तरफ से अक्सर यही बताया जाता रहा है कि उन्‍हें गुणवत्‍तापरक भोजन भी नहीं मिल रहा है। अस्‍पताल परिसर में एंबुलेंस कर्मियों के ठहरने का प्रबंध नहीं कराई है।
भोजन को लेकर ही हुआ ‘घोटाला’
कोविड अस्‍पताल में काम करने वाले कर्मचारियों और चिकित्‍सकों को भी जिले में सही भोजन नहीं उपलब्ध कराया गया। अप्रैल महीने में बेहतर तरीके से रहने की व्यवस्था न होने की वजह से डॉक्टर नाराज भी हुए थे और उन्होंने हंगामा भी किया था। इसके बाद में जिले के अधिकारियों ने उनको भुंदल लॉन में रहने की व्यवस्था कराई थी। हालांकि कुछ समय के बाद उन लोगों को गोपाल सरस्वती इंटर कॉलेज में रहने की व्यवस्था कराई गई, जहां पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्था नहीं हो रही थी। इसको लेकर भी कर्मचारियों के कई वीडियो वायरल भी हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि कोरोना वरियर्स को भोजन के लिए प्रतिदिन पांच सौ रुपये की व्‍यवस्‍था किए जाने के बावजूद घटिया क्‍वालिटी का भोजन दिया जाता रहा।
आपको बता दें कि भोजन प्रभारी डॉ मनोज शुक्ला के डीएम कैंप में आयोजित में बैठक न उपस्थिति होने से ही मामला बिगड़ा है। डीएम सीएमओ पर नाराज हुए थे और उन्होंने अनजाने में सीएमओ को बहुत कुछ कह दिया था। ऐसा कहा जा रहा है कि मरीजों से कर्मचारियों तक को महज 50 रुपये की थाल ही उपलब्ध कराई गई थी और उसका बिल 500 रुपये का काटा गया है। जिले में जिस तरह से भोजन में घोटाला हुआ है, उसकी कहीं न कहीं डीएम पोल खोलने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही सीएमओ डॉ संजय शर्मा अपनी बाजी में जीतते हुए सफल हो रहे हैं।

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