मंत्री के निजी सचिव, बड़े अफसरों और कुछ कर्मचारियों के बीच साठगांठ से सचिवालय में फर्जी दफ्तर बना कर करोड़ों रुपये का खेल खूब चला। वर्ष 2018 में पशुधन फर्जीवाड़ा के साथ ही खाद्य आपूर्ति विभाग का नमक घोटाला भी उजागर हुआ। इस खेल में सचिवालय के समीक्षा अधिकारी, कई अन्य कर्मचारी और अफसर शामिल रहे।

दो आईपीएस के खिलाफ कार्रवाई के बाद जल्दी ही कुछ और अफसरों के खिलाफ की जानी है। इनके खिलाफ भी कई साक्ष्य एसटीएफ और विवेचक के पास हैं। बस, कुछ तथ्यों की पड़ताल बाकी रह गई है। सोमवार को दो आईपीएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अन्य सचिवालय में हड़कम्प मच गया है। वहीं शक के दायरे में आये कई आरोपी विवेचक को बयान देने से अभी तक बचते रहे हैं।

पशुधन फर्जीवाड़े के खुलासे के समय ही साफ हो गया था कि इस गिरोह का नेटवर्क बहुत बड़ा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, नये-नये राज खुलते गए। सबसे बड़ा खुलासा तो यही हुआ कि सारा खेल पशुधन राज्यमंत्री जय प्रताप निषाद के दफ्तर में हुआ। लगातार बाहरी लोग बेधड़क सचिवालय के अंदर प्रवेश पाते रहे। फर्जीदफ्तर तक बन गया। इतना ही नहीं फर्जी वर्क आर्डर भी तैयार कर पीड़ित को थमा दिया गया। एसटीएफ के अफसरों ने तभी कह दिया था कि सचिवालय के अंदर इस तरह से फर्जीवाड़ा बिना मिलीभगत के सम्भव नहीं हो सकता।

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