पूर्व काबीना मंत्री व बसपा के वरिष्ठ नेता रामवीर उपाध्याय के शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि रामवीर उपाध्याय शीघ्र भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

2022 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए मौजूदा समय में जिस तरह से बसपा, सपा और कांग्रेस में ब्राहृाणों को अपने पाले में खींचने के लिए होड़ लगी हुई है, ऐसे समय में बसपा के ब्राहृाण नेता के रूप में जाने वाले रामवीर उपाध्याय का मुख्यमंत्री से मिलने के मायने समझे जा रहे हैं। रामवीर उपाध्याय के भाई और पूर्व विधायक मुकुल उपाध्याय पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद से रामवीर बसपा में काफी समय से उपेक्षित चल रहे हैं।

भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज होने के बाद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा है कि रामवीर के जाने से उनकी पार्टी को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। रामवीर उपाध्याय बसपा के पुराने नेता हैं और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। आगरा के आसपास के क्षेत्रों में वह बसपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में जाने जाते रहें हैं। बसपा में वह अपने को काफी समय से उपेक्षित महसूस करते रहे हैं।

वहीं, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा है कि रामवीर उपाध्याय बसपा से विधायक हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें पहले ही पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा है कि उनका बेटा बसपा का सदस्य नहीं है। अगर वो भाजपा में जाते हैं तो बसपा को किसी तरह का फर्क नहीं पड़ता।

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