सुरेश कुमार
सुल्तानपुर जिले में मानवता को तार-तार करने वाली खबर आ रही है। जहां पर स्वास्थ्य विभाग में बिल्कुल ही मानवता नहीं दिखी। विभाग की तरफ से वृद्ध दंपत्ति को अपने को ले जाने के लिए शव वाहन नहीं उपलब्ध कराया गया। यही नहीं, जब बस अड्डे पर पहुंचें तो बस वालों ने भी शव को साथ में ले जाने से मना कर दिया। इस घटना की जानकारी जब स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों को हुई तो उन्होंने जबरन बस में बैठाकर कादीपुर पहुंचाया। जहां से वह अपने पोते के शव को ई-रिक्शा की मदद से घर ले गए हैं।
वाकया कुछ इस तरह का है कि सुल्तानपुर के पडोसी जनपद जौनपुर के सरपतहा थानाक्षेत्र के उसरौली गांव के रहने वाले 3 वर्षीय दिव्यांश की तबियत आज सुबह अचानक ख़राब हो गई। जिसके बाद उसके बाबा रामयश विन्द उसे कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य के ले गए। लेकिन हालत बिगड़ता देख डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर उसका इलाज तो हुआ लेकिन दिव्यांश की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन उसका शव ले जाने के लिये शव वाहन की तलाश करते रहे। 108 एम्बुलेंस वाले ने 1800 रुपयों की डिमांड की तो पैसा न होने की वे गुहार लगाते रहे लेकिन की किसी भी स्वास्थ्य कर्मी का दिल नही पसीजा।
थक हारकर रामयज्ञ पैदल ही अपनी पत्नी और पोते को लेकर बस अड्डे पहुंचा, लेकिन वहां भी रोडवेज कर्मियों ने उसे बस में बैठाने ने इंकार कर दिया। इस बात की जानकारी जब स्थानीय लोगों हुई तो बस से ले जाने के लिये उन्होंने हंगामा शुरू किया। इसके बाद में वहां पहुंची पुलिस ने जब कड़ाई की तो बस वाला उन्हें बैठाकर कादीपुर तक ले गया। वहां पहुंचने पर उसने अपनी आप बीती सुनाई जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से ई रिक्शे के जरिये उसे उसके घर तक पहुंचवाया गया। इस तरह से जिला अस्पताल की तरफ से बिल्कुल ही मानवता नहीं देखने को मिली।

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