भारी बारिश के कारण भले ही उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में बाढ़ व जलभराव की स्थिति हो लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि राज्य के 10 जिलों में खरीफ फसलों पर सूखे जैसे हालात हो रहे हैं। कारण बरसात की आधी अवधि बीत जाने के बाद भी इन जिलों में जून से अब तक अर्थात 15 अगस्त तक 60 प्रतिशत से भी काफी कम बारिश हुई है।

इसमें तीन जिले तो ऐसे हैं, जहां के हालत तो और भी खराब हैं। इन  3 जिलों में अब तक 40 फीसदी से भी कम बारिश हो पाई है। इतनी कम बरसात के बाद भी सरकार इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं कर सकती, कारण इसके लिए जो तकनीकी मानक तय किए गए हैं उसे ये प्रभावित जिले पूरा नहीं करते। लिहाजा सरकार चाहकर भी इन्हें सूखाग्रस्त घोषित नहीं कर पा रही है।

हालांकि केवल अगस्त महीने के आज तक के बारिश के आंकड़ों को देखें तो प्रदेश के 23 ऐसे जिले हैं, जहां काफी कम बरसात हुई है। इसमें 10 जिले 40 फीसदी से भी कम बारिश वाले है जबकि 13 जिले ऐसे हैं जहां 40 से 60 प्रतिशत के बीच ही इस माह बरसात हुई है। प्रदेश में 18 जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने का समय निर्धारित माना जाता है। उस तिथि से अब तक सबसे कम बरसात वाले कुल 10 जिलों को ही सूखा प्रभावित माना जा रहा है क्योंकि इन जिलों में अब तक खरीफ फसलों की बुआई-रोपाई सभी प्रभावित हुई है।

सूखा ग्रस्त घोषित करने के ये हैं मानक
-कुल बारिश का 50 प्रतिशत से भी कम बरसात हुई हो।
-मानसूनी बरसात नहीं होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई न हो पाई हो।
-फसल की बुआई के बाद बारिश के अभाव में 50 फीसदी फसल सूख गई हो।
-बाजरे की बुआई की अन्तिम तिथि 10 अगस्त बीत चुका हो लेकिन खेत सूखे खाली पड़े हों।
-बारिश के अभाव में खेत की नमी गायब हो।

इन जिलों की है सबसे खराब हालत जहां 40 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है- कौशाम्बी, गाजियाबाद तथा गौतमबुद्धनगर
इन जिलों में 40 से 60 प्रतिशत हुई है बरसात- हापुड़, कानपुर देहात, रामपुर, मथुरा, अमरोहा, महोबा तथा बुलन्दशहर

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