एक दौर वह भी था जब कहा जाता था कि दौलत के बलबूते हर सपने को अपनी मुट्ठी में कैद करना और उन सपनों को हकीकत में बदलना तो कोई किंगफिशर के किंग विजय माल्या से सीखे। लेकिन अब माल्या का तिलिस्म टूट चुका है। आईपीएल मैचों में पैसा लुटाना और नए साल के कैलेंडर के लिए मॉडलों की मनचाही फोटो खिंचवाना माल्या के शौक रहे हैं। खस्ताहाल एयर डेक्कन को खरीदने की सनक हो या फिर अय्याशी के लिए बॉलीवुड हीरोईनों पर किंगफिशर का खजाना लुटाने का अनोखा अंदाज, यह सब विजय माल्या की शान बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि किंगफिशर को बदहाली की दास्तान बनाने के लिए काफी हैं। किंगफिशर की लगातार बिगड़ती सेहत ने विजय माल्या के माथे पर चिंता की लकीरें भले ही न बढ़ाई हों पर एयरलाइंसके बचे हुए कर्मचारियों की नींदे उड़ गई हैं। उन्हें खुद पता नहीं कि कब उन्हें भी घर बैठा दिया जाए। किंग फिशर बिगड़ती सेहत पर प्रीति सिंह चौहान एक नजर
माल्या की राजनीतिक पहुंच के चलते सरकारी बैंक ने दिवालिया होने की कगार पर पहुंची इस एयरलाइंस को समय समय पर भरपूर मदद दी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने करोड़ों का कर्ज दे कर स्थितियां कुछ संभालने की कोशिश की पर बाप बेटों के ऐश ने 60 हजार करोड़ की कम्पनी को जमीन पर ला पटका। हजारों पायलटों व कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। वर्ष 2008 में जेट एयरवेज में भी कर्मचारियों व पायलटों को घर बैठने पर मजबूर होना पड़ा था। पर कर्मचारियों व पायलटों की एकजुटता के कारण जेट एयरवेज प्रबंधन ने उन्हें काम पर वापस बुला तो लिया था पर सेलरी में जबरदस्त कटौती यानी कुल सेलरी का 25 प्रतिशत ही वेतन मिलने की शर्त भी लगा रखी थी। किंग फिशर ने भी अपने आधे से ज्यादा कर्मचारी घर पर बैठा दिए हैं। अभी कई और पर मंदी की तलवार लटकी है।
भारतीय एविएशन उद्योग में के क्लास के साथ मैदान में उतरी किंगफिशर की कहानी शायद खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है।  आकाश में उड़ान भरने निकली किंगफिशर अब अपनी गतिविधियों को समेट रही है। हालांकि अफवाहों के बीच एक अफवाह यह भी है कि किंगफिशर कहीं नहीं जाएगी और अपने आपको दोबारा पुनर्गठित करके मैदान में बनी रहेगी।
किंगफिशर पर मेहरबान सरकार ने खस्ताहाल एयरलाइंस का बोझा ढोने से इंकार कर दिया है। सरकार की इस मनाही के बाद किंगफिशर और किंगफिशर के किंग विजय माल्या दोनों ही डांवाडोल हालत में जा पहुंचे हैं। किंगफिशर की यह हालत अचानक ही नहीं हुई है। यह कम्पनी महीनों से दिवालिया होने की हालत में है। न उसके पैरों में अपने बूते खड़े रहने की ताकत है और न ही पंख पसारकर हवा में उडऩे की कूबत, इसलिए कब किंगफिशर दिवालिया घोषित हो जाए कहा नहीं जा सकता।
ङ्क्षकगफिशर के दिवालिया होने का असर माल्या परिवार से ज्यादा उन समूहों व बैंकों पर पड़ेगा जिन्होंने इस एयरलाइंस पर अपना पैसा लगा रखा है। 2005 में शुरू की गई किंगफिशर एयरलाइन्स कम्पनी की आज बाजार में कीमत 1250 करोड़ रुपया है। (शेयर बाजार के हिसाब से इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है।) इस 1250 करोड़ की किंगफिशर कम्पनी में मालिक विजय माल्या की हिस्सेदारी है 58 प्रतिशत, अगर किंगफिशर के डैने (पंख) समेट लिए जाते हैं तो माननीय सांसद विजय माल्या कोई 730 करोड़ रुपए का निवेश गंवा देंगे, लेकिन नुकसान उन्हीं का अकेले नहीं होगा। कई और हैं जिनका बंटाढ़ार हो जाएगा।
वित्तीय संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की विमानन कम्पनी किंगफिशर एयरलाइंस ने कई शहरों की अपनी विमान सेवाएं कुछ समय के लिए स्थगित कर दी हैं। एयरलाइन ने नई पूंजी का प्रबंध होने तक कुछ कर्मचारियों को काम पर न आने को कहा है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या की जानकारी नहीं दी गयी है। किंगफिशर ने मंगलवार को ये घोषणाएं करते हुए कहा कि कई केंद्रों के लिए परिचालन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। कम्पनी ने नयी पूंजी मिलने तक अपने परिचालन को सीमित रखने की योजना के तहत ये कदम उठाए हैं। एयरलाइन गम्भीर वित्तीय संकट में है और इसके बहुत से कर्मचारी पिछले तीन महीने से वेतन नहीं पा रहे है। कम्पनी ने कर्मचारियों को हटाने की सम्भावना से भी इनकार नहीं किया है। उसका कहना है कि यह सब कम्पनी के लिए पैसे की व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर बैंकों तथा सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। किंगफिशर के एक प्रवक्ता ने कहा कि चूंकि हम नयी पंूजी मिलने के बाद ही उन केंद्रों के लिए सेवाओं को फिर शुरू कर सकते हैं। इसलिए उन केंद्रों के ज्यादातर कर्मचारियों को काम पर नहीं आने को कहा गया है, पर उनका नाम कम्पनी की सूची में बना रहेगा।’ प्रवक्ता ने ऐसे कर्मचारियों की संख्या की जानकारी नहीं दी।
किंगफिशर के कर्मचारियों को निकालने के बारे में चल रही अटकलबाजियों के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने बताया कि अभी हम थम कर चल रहे हैं और एफडीआई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और रोजमर्रा के काम के लिए पूंजी की व्यवस्था आदि के बारे में सरकार तथा बैंकों के समूह के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन फैसलों का कर्मचारियों के बारे में हमारे निर्णय पर बड़ा प्रभाव होगा।’ भारतीय स्टेट बैंक सहित 13 सरकारी बैंकों का गत फरवरी में इस एयरलाइन पर 5,608 करोड़ रुपए का बकाया था। कम्पनी पर कुल 7,000 करोड़ रुपए का ऋण है। किंगफिशर ने कहा है कि जब तक उसे अतिरिक्त पूंजी नहीं मिलती वह इन गर्मियों में 20 विमानों के साथ कुल 120 उड़ानों का ही परिचालन करेगी। जाड़ों में वह 28 विमानों के साथ 140 उड़ानों का परिचालन कर रही थी जबकि उसने 64 विमानों के साथ दैनिक 400 उड़ानों के परिचालन करने का प्रस्ताव कर रखा था।
किंग फिशर के दिवालिया होने पर बैंक तेल भारतीय विमान प्राधिकरण के साथ ही के क्लास का मजा लेने वाले यात्री और कम्पनी के कर्मचारी एक झटके में बहुत कुछ गंवा बैंठेंगे। कम्पनियोंपहला नम्बर आएगा उन वाणिज्यिक बैंकों का जिन्होंने माल्या के किंगफिशर में पैसा लगा रखा है। इसमें सबसे आगे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जिसने कुछ समय पहले घनघोर बेवकूफी में इस कम्पनी के बकाया कर्ज को माफ कर उसे कम्पनी में 23 प्रतिशत की हिस्सेदारी में बदल दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि कर्ज के बल पर खड़ा किया गया किंगफिशर अगर डूबता है तो सीधे-सीधे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 291 करोड़ रुपए डूब जाएंगे।
 कईयों का लगेंगे झटके
 वाणिज्यिक बैंक जिसमें फिर आगे होगा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया। क्योंकि इस हवाई कम्पनी के खाते इन्हीं वाणिज्यिक बैंकों में हैं। आखिरी गिनती के समय कम्पनी पर कोई 7000 करोड़ के कर्जे बकाया थे। कर्जों पर लदा ब्याज बढ़ रहा है इसलिए यह कर्जे हर दिन बढ़ रहे हैं। कम्पनी को दिवालिया घोषित करने और उसके कर्जों को खत्म करने की नौबत आते आते यह कर्जा 8 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। लेकिन  बैंक कुर्की करने के लिए दौड़ेंगे तब छूटेंगे उपनके पसीने। अपनी पूंजी को दोबारा पाने का यही उनके पास आखिरी हथियार होता है। लेकिन जब बैंक कुर्की करने के लिए दौड़ेगे तो उनके हाथ में कुछ नहीं आएगा। उन्हें कोई सम्पत्ति नहीं मिलेगी। कारण, इस कम्पनी ने कोई हवाई जहाज खरीदा ही नहीं। कम्पनी के पास जो कुल 16 जहाज हैं वे किराए के हैं, बाकी उसने लम्बे चौड़े जहाजों का ऑर्डर जरूर दे रखा है। जब बैंक कुर्की करने जाएंगे तो किराए के यह जहाज उन्हीं के मत्थे पड़ सकते हैं क्योंकि तब उन्हें यह भी देखना होगा कि इन जहाजों का किराया चुकाया गया है या नहीं।
तीसरे स्थान पर आएंगी सरकारी तेल कम्पनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम जो इस एयरलाइन्स को ईंधन बेंचती हैं। व्यापार में उधार पर खरीदना और देर से चुकता करना यह सब तो चलता ही रहता है। पर इस मामले में यह उधारी छोटी-मोटी नहीं है। पूरी उधारी करीब एक हजार करोड़ के आस पास है इसलिए किंगफिशर पर उधारी से तेल कम्पनियों का ही तेल निकल जाने की पूरी गांरटी है।
  चौथे स्थान पर है भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और उसके साझीदार जैसे मुम्बई और दिल्ली के निजी प्रबंधन में काम करने वाले हवाई अड्डे ऐसा माना जाता है कि इस कम्पनी को इन हवाई अड्डों पर जहाज उतारने, खड़ा करने, सवारियों का चढ़ाने उतारने और जहाज को उड़ाने की सुविधाओं, सेवाओं के लिए जो पैसा देना था वह किंगफिशर के खाते में बकाया है। यही कोई 250 करोड़ रुपए।
किंगफिशर के दिवालिया होने की हालत में आयकर विभाग और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को 422 करोड़ रूपए की चपत लगेगी। कम्पनी ने अपने कर्मचारियों की तनख्वाह में से यह सब पहले ही काट लिया है लेकिन न तो उसने सरकार को दिया है और न ही कर्मचारियों के कोटे में भविष्य निधि में जमा किया है।  किंगफिशर के दिवालिया होने की हालत में छठे नम्बर पर चोट खायेंगे वे यात्री जो अब तक के क्लास का मजा ले रहे थे। जो के क्लब के सदस्य हैं या फिर लम्बी अवधि की बुकिंग कराए बैठे हैं उनके पैसे डूब जाएंगे। अगर अनुमान के लिए एक तिहाई ग्राहकों का आकड़ा ही लें तो किंगफिशर के पास करीब 2000 करोड़ रुपए जमा होने चाहिए।
सातवें और आखिरी नम्बर पर आते हैं वे 7000 हजार कर्मचारी जिनमें से आधे को अलविदा कह दिया है। इन सात हजार कर्मचारियों का भविष्य आगे क्या होगा यह न तो उन्हें पता है और न ही उनके किंग विजय माल्या को, इन कर्मचारियों को करीब साठ करोड़ की चपत लगेगी जिसमें उनकी ग्रेच्युटी, छोटे मोटे भत्ते और छुट्टियों की कमाई शामिल नहीं है।
खुदा न करे, कल को किंगफिशर अपने आपको दिवालिया करार दे दे तो किंगफिशर के किंग जरूर अपना 730 करोड़ रुपए का निवेश गंवा देंगे लेकिन हमारे आप जैसे आम आदमी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी 11,000 करोड़ रुपए। कर्जखोरी से व्यापार खड़ा करने और उसे निजी मुनाफे के साथ दिवालिया करार करवा देने का यह खेल थोड़ा अजीब है जो आसानी से समझ में नहीं आता है। कहने के लिए तो मालिक के 730 करोड़ भी डूब रहे हैं लेकिन कर्ज की कीमत पर खड़ी की गई ऐसी कम्पनियों में मालिकाना हक भी मुफ्त का ही होता है। इसलिए उनके हर एक रुपए के नुकसान पर हमारे 15 रुपए मिट जाएंगे। पता नहीं सरकार और किंगफिशर के बीच क्या बातचीत चल रही है लेकिन किंगफिशर के किंग सरकार को यह तो कह ही सकते हैं कि आप मेरी एयरलाइन्स को डुबोना चाहें तो डुबो दें पर जितने गहरे गड्ढ़े में मैं गिरूंगा उससे गहरी खाई में आप चले जाएंगे।
किंगफिशर को फर्श पर पटकने वाले अजब गजब शौक
कम्पनी की माली हालत ठीक न होने के बावजूद इस साल भी माल्या की कम्पनी ने हॉट और सेक्सी किंगफिशर कैलेंडर प्रकाशित किया है। कैलेंडर को प्रकाशित करने के लिए माल्या हर साल करोड़ों रुपए खर्च करते हैं। कैलेंडर के लिए देश-विदेश की मॉडलों का फोटो शूट किया जाता है। इसी कैलेंडर से मॉडल पूनम पांडे को पब्लिसिटी मिली थी। सबसे खास बात यह है कि माल्य खुद कैलेंडर के लिए मॉडल्स का चयन करते हैं। इसमें वे मॉडल के हरेक शारीरिक पहलू पर ध्यान देते हैं।  माल्या के शौक ने हिंदुस्तान को एक ऐसी पहचान दी है, जिसे भारतीय कभी नहीं भूल सकते। 2007 में माल्या ने 90 मिलियन यूरो खर्च करके फार्मूला-1 (फोर्स इंडिया) टीम खरीदी। एफ-1 टीम खरीदने के बाद भारत को भी महंगे खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। अक्टूबर 2011 में सहारा इंडिया परिवार ने विजय माल्या के स्वामित्व वाली फॉर्मूला-वन टीम में 42.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली। जिसके बाद नई टीम का नाम फोर्स इंडिया से बदलकर ‘सहारा फोर्स इंडिया’ हो गया।
माल्या को क्रिकेट प्रेम भी किसी से छिपा नहीं है। फटाफट क्रिकेट इंडियन प्रीमियर लीग में (बैंगलोर रॉयल चैलेंजर्स) नाम से उनकी टीम है। इस टीम को उन्होंने 464.3 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि खर्च करके खरीदा। सबसे दिलचस्प बात है कि यह टीम आईपीएल की दूसरी सबसे महंगी टीम थी। माल्या मैच के बाद खिलाडिय़ों की थकावट को दूर करने के लिए देर रात तक पार्टियों का आयोजन पर भी करते हैं। कई लोग तो ये भी कहते हैं कि माल्या खिलाडिय़ों को एस्कार्ट्स भी उपलब्ध कराते हैं।  माल्या के पास 80 के दशक से ही शानदार याट्स हैं। इनमें से सबसे खास है एक 315 फुट लम्बी लग्जरी याट जिसकी कीमत 450 करोड़ रुपए है। इन याट्स में माल्या ने कई जगहों की यात्राएं की है, जिनमें लक्षद्वीप उनकी सबसे पसंदीदा जगह है। वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ लक्षद्वीप जाकर जमकर मौज-मस्ती करते हैं। स्कूबा डाइविंग माल्या का एक और पसंदीदा शौक है। वे अपने बेटे सिद्धार्थ के साथ स्कूबा डाइविंग से समुद्र की गहराइयों में उतरने का खूब मजा लेते हैं।
किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक माल्या के पास अपने कई हवाई जहाज हैं। लेकिन उनमें सबसे खास है ए-319। उन्होंने ए-319 की साज-सज्जा और फायरप्रूफ अपहोल्स्टरी लगवाने के लिए करीब 180 करोड़ रुपए खर्च किए। इस हवाई जहाज में एक साथ 24 लोग बैठ सकते हैं। घर और ऑफिस दोनों की सुविधाएं इसमें शामिल हैं। विमान बीच में एक बार ईंधन भरवाकर लंदन या अमेरिका तक की उड़ान भर सकता है। ए-319 के अलावा माल्या के पास गल्फस्ट्रीम, हॉकर और बोइंग 727 विमान भी है। देश के धन कुबेरों के बीच आलीशान महल बनाने की होड़ लगी हुई है। तो माल्या क्यों पीछे रहते। वे भी एक आलीशान महल बनवाने जा रहे हैं। यह मुकेश अंबानी के महल ‘एंटीलिया’ को टक्कर देगा। माल्या का यह 34 मंजिला नया आशियाना बंगलुरु की यूवी सिटी टॉवर में बनेगा। गगनचुंबी टावरनुमा इस इमारत में सबसे ऊपर एक एकड़ में माल्या का पेंटहाउस होगा। इस इमारत में प्राइवेट लिफ्ट, वाइन सैलर, इनडोर गर्म पानी का पूल, आउटडोर पूल, जिम, सैलून, स्पा और हेलिपैड होगा।
भारतीय धरोहरों को संजोया
माल्या टीपू की तलवार और महात्मा गांधी के कटोरी-चम्मच खरीदने का शौक रखते हैं। 2003 में लंदन में हुई नीलामी में उन्होंने 350,000 पाउंड में टीपू की एक तलवार खरीदी थी। उन्होंने महात्मा गांधी की नितांत निजी वस्तुओं को खरीदकर भी खूब सुर्खियां बटोरी हैं। उन वस्तुओं में गांधीजी का चश्मा, वर्ष 1910 की घड़ी, एक जोड़ी चप्पल, कटोरा और एक थाली शामिल है। इन वस्तुओं के लिए माल्या ने 18 लाख डॉलर चुकाए थे।

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