मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार की कोसी-मेची नदी परियोजना को राष्ट्रीय नदी जोड़ परियोजना में शामिल किया जाए। इससे दो लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित होगा। नदी जोड़ने से बाढ़ की आशंका कम होगी और पानी का लोग ज्यादा उपयोग कर सकेंगे। बाढ़ नियंत्रण में भी सहूलियत होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित छह राज्यों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अपनी यह मांग उनके समक्ष रखी।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की समीक्षा बैठक के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। कहा कि उत्तर बिहार बाढ़ से अभी पूरी तरह प्रभावित है। राज्य में सितंबर तक बाढ़ की आशंका बनी रहती है। आगे कहा कि गंगा नदी के कारण भी वर्ष 2016 में राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। फरक्का बराज से जल निकासी में अब ज्यादा समय लग जाता है, जिससे गंगा नदी का पानी ज्यादा दिनों तक अधिक क्षेत्रों में फैला रहता है। इस पर भी विचार करने की जरूरत है।

सीएम ने कहा कि भारत व बांग्लादेश के बीच गंगा नदी को लेकर किए गए समझौते के अनुसार फरक्का बराज पर गंगा का जलस्राव 1500 क्यूमेक सुनिश्चित करना पड़ता है। जबकि गंगा से बिहार में मात्र 400 क्यूमेक जल प्राप्त होता है। शेष 1100 क्यूमेक जल गंगा नदी में बिहार के क्षेत्र से जाता है। इस प्रकार बिहार में गंगा का जल होते हुए भी राज्य इसका उपयोग नहीं कर पाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (आपदा राहत कोष) के लिए 1880 करोड़ का प्रावधान है। इसमें 20 प्रतिशत स्टेट डिजास्टर मिटीगेशन फंड का प्रावधान है एवं 80 प्रतिशत स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड में बांटा गया है। इसके संबंध में अभी पूरी स्पष्टता नहीं है। स्टेट डिजास्टर मिटीगेशन फंड को अलग करने की जरूरत नहीं है। आपदा राहत कोष में 75 प्रतिशत केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य की राशि का प्रावधान है। इसमें सहायता अनुदान (ग्रैचुट्स रिलीफ) पर एक बार में 25 प्रतिशत राशि खर्च करने की अधिसीमा है, जिसे हटाया जाए।

राज्य के खजाने पर बोझ कम हो सकेगा 
सीएम ने कहा कि आपदा राहत कोष से अनुदान राशि की सीमा हटाने से आपदा के कारण प्रति वर्ष राज्य सरकार के खजाने पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकेगा। हमलोगों को सहायता अनुदान पर काफी खर्च करना पड़ता है। हमलोग बाढ़ पीड़ित हर परिवार को छह हजार का सहायता अनुदान पहले से देते आ रहे हैं। वर्ष 2017 में 2385 करोड़ 42 लाख और 2019 में 2003 करोड़ 55 लाख की राशि वितरित की गई थी।

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