पाकिस्तानी आतंकियों ने ही कश्मीरियों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के निर्वासित नेताओं औऱ कार्यकर्ताओं ने अनुच्छेद 370 हटने के एक साल पूरे होने पर यह प्रतिक्रिया दी है। इन नेताओं का आरोप है कि भारत में शांति के माहौल को बिगाड़ने के अपने एजेंडे के तहत पाकिस्तान लगातार एलओसी के उस पार हिंसा को बढ़ावा देने में जुटा है।

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी ने मंगलवार (4 अगस्त) को एक वेबिनार में कहा कि पाकिस्तान के तथाकथित ‘कश्मीरियों के लिए संघर्ष’ का सबसे ज्यादा खामियाजा इलाके के बाशिंदों ने ही सहा है। कश्मीर पर कब्जे के उसके कई प्रयास नाकाम हो चुके हैं, लेकिन उसका छद्म युद्ध लगातार जारी है।

वेबिनार में कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने कहा कि पाकिस्तान के हाथ कश्मीरियों के खून से रंगे हैं। पीओके के राजनीतिक कार्यकर्ता नसीर अजीज खान ने कहा कि यह खुला रहस्य है कि आतंकी औऱ कट्टरपंथी पाकिस्तान में प्रशिक्षण पाते हैं औऱ भारत में उनकी घुसपैठ कराई जाती है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ खुद यह बात कबूल कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रक्षा और विदेश नीति पूरी तरह फौज के हाथों में है। सीमापार आतंकवाद को सैन्य, वित्तीय और अन्य जरूरतों के समर्थन को कश्मीरियों के नाम पर आजादी का संघर्ष बताता है, लेकिन वह बेनकाब हो चुका है। पांच अगस्त 2019 को केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में शांति एवं विकास युवाओं का नया मंत्र बन गया है। हालांकि पाकिस्तान अपने गुर्गों के जरिये अभी अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

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