shaski  maharajउन्नाव में भाजपा के साक्षी महाराज के खिलाफ बढ़तेे विरोध और अन्नू टंडन व ब्रजेश पाठक के बनते बिगड़ते समीकरण पर मोहित सिंह की रिपोर्ट:
कानपुर से सटा संसदीय क्षेत्र उन्नाव की अपनी ऐतिहासिक पृष्ठï भूमि है जहां गंगा नदी का अपना महत्व है। इसे रेखांकित करता है वहीं चन्द्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे के ऐतिहासिक महत्व को भी परिभाषित करता है। 20 लाख मतदाताओं वाली इस लोकसभा में इस बार ब्राहमण दलित और मुस्लिम अपना खेल दिखा सकते हैं। बारी-बारी से भाजपा और कांग्रेस का गढ़ रही उन्नाव लोकसभा क्षेत्र पर वर्तमान समय में कांग्रेस की सांसद अन्नु टण्डन का कब्जा है। भाजपा ने इस बार यहां साक्षी महाराज को चुनाव मैदान में उतारा है तो बसपा और सपा ने ब्राहमण उम्मीदवार उतारकर ब्राहमण मतों का विभाजन करने की कोशिश की है। इसके पीछे सीधा सा एक कारण है कि भाजपा को लड़ाई में आने से रोका जा सके। वैसे माना यह जा रहा है कि सपा ने इस सीट पर कांग्रेस से समझौता करते हुए कमजोर प्रत्याशी उतारा है स्थितियां साफ तौर पर संकेत कर रही हैं कि मुख्य मुकाबला बसपा और कांग्रेस में ही होगा। भाजपा यहां तीसरे नम्बर पर जा सकती है। भाजपा के अन्दरूनी सूत्रों के अनुसार भाजपा के कुछ बड़ों के इशारे पर यहां साक्षी महाराज को उतारा गया है। जिनके ऊपर भाजपा के पूर्व ब्राहमण कददवर नेता ब्रहमदत द्विवेदी की हत्या का आरोप है। साक्षी महाराज को टिकट देने से भाजपा में आन्तरिक संघर्ष शुरू हो गया है कि साक्षी महाराज के पीछे भाजपा का कौन सा बड़ा नेता खड़ा है जिसने उन्हें उन्नाव संसदीय क्षेत्र में पहुंचा दिया है। लोगों का मानना है कि इससे ब्राहमणों के बीच एक गलत सन्देश प्रचारित हो रहा है। क्या भाजपा ब्राहमण विरोधी तेवर दिखा रही है जहां इसके लिए कल्याण सिंह को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के राष्टï्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की संदिग्ध एवं विवादस्पद भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक आलोचकों का मानना है कि भाजपा के लिए बेहतर होता कि वह यहां क्षत्रिय उम्मीदवार उतारती। यदि भाजपा के आन्तरिक सर्वेक्षणों पर नजर दौड़ायें तो भाजपा यहां संघ विचारक और वरिष्ठï पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया पर दांव लगाना चाहती थी। ब्राहमण उम्मीदवार के रूप में यहां मधु मिश्रा और ह्दय नारायण दीक्षित भी पंक्ति में थे लेकिन भाजपा ने यहां साक्षी महाराज को उतार कर स्वयं को लड़ाई से बाहर कर दिया है।
6 विधान सभाओं के इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधान सभाओं सफीरपुर, हसनगंज और बांगरमऊ तीनों मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हैं वहीं दूसरी ओर भगवन्त नगर, उन्नाव और पुरवा में कांग्रेस प्रत्याशी अन्नु टण्डन को इस बार जबरदस्त टक्कर मिल रही है। मतदाता इस बार अन्नु टण्डन के आर्थिक तिलिस्म से दूर भागता दिख रहा है। वह अपना दांव वहीं लगायेगा जहां उसे विकास की धारा विकसित होती दिख रही है। चुनाव से 6 महीने पहले बसपा प्रत्याशी एवं राज्यसभा सांसद ब्रजेश पाठक ने जनसुविधाओं का पिटारा खोला है उसने बसपा को काफी ऊपर की पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया है।

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