कोरोना महामारी के दौर में ग्रामीण रोजगार में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के शुरुआती साढ़े तीन महीने के दौरान मनरेगा का आधा फंड राज्यों को आवंटित कर दिया गया है। प्रस्तावित कुल सालाना फंड का 44 फीसदी हिस्सा राज्यों ने खर्च भी कर लिया है।

पीपल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉएमेंट गारंटी समूह की तरफ से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक कुछ राज्यों ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल से अब तक इस रकम का इस्तेमाल आवंटन से भी ज्यादा कर लिया है। संस्था से सदस्य और अजीम प्रेमजी युनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने हिन्दुस्तान को बताया कि रोजगार देने के मामले में राज्य काफी तेजी दिखा रहे हैं।

उनके मुताबिक बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश ने अवंटन से 52 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर लिए हैं, जबकि कई राज्यों में अभी आधा फंड ही खर्च हो पाया है। उन्होंने ये भी कहा कि मनरेगा के तहत सभी राज्यों को कुल 50,610 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जिसमें से 44,093 करोड़ रुपये खर्च हो गए हैं। वहीं राज्यों के पास फिलहाल 6,517 करोड़ रुपये ही बचे हैं। कुल खर्च रकम में 3185 करोड़ रुपये का बकाया पेमेंट भी शामिल है।

मनरेगा के तहत मौजूदा वित्त वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का प्रावधान है। इसमें से 61,500 करोड़ रुपये बजट में दिए गए थे। वहीं महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों के वापस गांव लौटने के चलते इसमें 40 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए थे।

यूपी ने बजट से ज्यादा खर्च किए
आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश ने कुल आवंटित 5,117 करोड़ रुपये की राशि की जगह 5170.32 करोड़ रुपये का काम करा लिया है। राज्य की तरफ से अभी 180 करोड़ रुपये का पेमेंट बकाया भी चल रहा है जिसे नई राशि आवंटित होने के बाद दिया जाना है। बिहार ने आवंटित कुल 3,360 करोड़ रुपये में से 3,096 हजार करोड़ रुपये खर्च कर लिए हैं। राज्य के पास 264 करोड़ रुपये शेष बचे हैं।

झारखंड खर्च करने में सुस्त
मनरेगा के तहत खर्च में सबसे सुस्त रफ्तार झारखंड की देखने को मिली है। राज्य ने 1,508 करोड़ रुपये की आवंटित राशि में से 737 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानि आधी से ज्यादा रकम अभी भी राज्य के पास बची हुई है। हरियाणा ने आवंटित 242 करोड़ रुपये में से 185 करोड़ रुपये और उत्तराखंड ने 329 करोड़ रुपये में से 241 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

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