मोदी समेत सभी बड़े सत्ता के लिए अड़े हैं वहीं गुजरात में मोदी की विरासत आनन्दी बेन पटेल व माया बेन कोन्डानी की नजऱें मुख्यमंत्री के सिंहासन पर लगी हुई हैं। मोदी का उत्तराधिकारी बनने के लिए गुजरात में मची होड़ पर नजर डाल रहे हैं मोहित सिंह:2574_anandi1

अभी न चुनाव हुआ न परिणाम आया न प्रधान मंत्री की कुर्सी किसी दल के लिए आरक्षित हुई लेकिन एक पार्टी विशेष भाजपा ने प्रधान मंत्री की उम्मीदवारी पर अपना नुमाइंदा देश के सामने ला खड़ा किया इसके साथ साथ जिस देश प्रदेश को उसके प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी छोड़ेंगे उस प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए संघ (नागपुर) ने मंत्रणा शुरू ही नहीं की बल्कि उनके इस पद के लिए संघ दावेदार कर रहे लोगों की उनके बीते कार्यकाल और वर्तमान में भाजपा के लिय उनकी क्या कार्यप्रणाली रही है। इस पर गौर करना कर दिया है। संघ अब ऐसा कोई भी रिस्क नहीं उठाना चाहता जिससे आगे चलकर उसे कोई भारी नुकसान उठाना पड़े। सूत्रों के हवाले से खबर है कि अगर भाजपा केन्द्र में परचम लहराती है तो गुजरात में मोदी जैसा ही व्यक्तित्व उनकी विरासत सम्भालेगा । भाजपा हाई कमान और संघ बिल्कुल बेफ्रिक सा हो गया है कि उसको दिल्ली की राजगद्ंदी देश की जनता उसे सौंपेगी। इसीलिए मोदी के उत्तराधिकारी के लिए अभी से संघ नागपुर में कुछ बड़े और मोदी के करीबी अभी से अपनी अपनी बायोग्राफी लेकर संघ की चौखट पर दस्तक देने लगे है। यही नहीं मोदी के गुजरात में तो बकायदा कुछ उनके मंत्रीमण्डल के सदस्य भी अपने को मोदी का उत्तराधिकारी करार करने में जुटे है। गौरतलब हो कि गुजरात दंगों में मुख्य रूप से आरोपित और कई मुकदमों की छाया से ग्रस्त तेजतर्रार ही नहीं बल्कि विध्वसंकारी नेता के उपनाम से विख्यात पूर्व मंत्री माया बेन कोन्डानी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आंख लगाए हंै लेकिन मोदी ने नहीं वरन भाजपा और आर.एस.एस. प्रमुख ने उन्हे इतना आश्वासन तो दे दिया है कि अगर केन्द्र में बहुमत से सरकार बनी और उनपर मुकदमें वापस होने के बाद ही उनका सपना पूरा हो सकेगा । वही दूसरी ओर इस अहम पद के लिए आनन्दी बेन पटेल ने भी संघ पर अपनी दावेदारी ठोंक कर उसे मंथन करने पर मजबूर कर दिया है आनन्दी बेन पटेल के लिए कहा जाता है कि जब सरदार पटेल की प्रतिमा लगाने के लिये नरेन्द्र मोदी को उन्होंने ही इस योजना को अमल में लाने के लिये उत्साहित ही नहीं बल्कि उसको मूर्तरूप देने में सहयोग किया था । अब तीसरे दावेदार मोद ी मंत्री मण्डल में मंत्री वजू भाई बाला भी इन से कुछ कम नहीं नजऱ आ रहे है इन्होंने भी गुजरात दंगों के बाद मोदी पर मुस्लिमों पर जुल्म ढाने के दागों को मिटाने में अहम भूमिका निभायी गुजरात को देश में एक नया स्वरूप देने के लिये नरेन्द्र मोदी के साथ साथ कदम से कदम मिलाते रहे। वही इन सबसे अलग दिखाई देने वाले लगभग दो दशक पहले भाजपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले ही नहीं बल्कि कांग्रेस का दामन थामने वाले शंकर सिंह बाघेला अपने परिवार में वापस आने के लिए ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की कवायद में जुटें है जिसको लेकर वे नागपुर और दिल्ली का सफर तेजी से तय कर रहें है। गौरतलब हो कि बाघेला ने जब भाजपा छोड़ी थी तब उन्हे मनाया गया था लेकिन वे अडिय़ल रूख अख्तियार किये हुए थे।
लेकिन जब कांगे्रस में भी दोयम दर्जे का नागरिक करार करवा कर उन्हे चुनाव में हार का सामना अपने ही गुट द्घारा कराकर सोनिया के सामने उनका कद छोटा करा दिया गया था। इन सब हालातों से गुजकर बाघेला ने फिर से संघ प्रमुख से क्षमा याचना कर अपनी वापसी की गुजारिश तो की ही है। साथ ही साथ मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर गुजरात राज की गद्दी दिये जाने की पेशकश भी कर दी है। इस पेशकश पर संघ ने अभी तक उनकी इस पेशकश हामी तो नहीं भरी है। उसपर गौर करने का आश्वासन जरूर दे दिया है। कारण भी है कि जो भी दावेदार आ रहे है। वे कही न कही गम्भीर आरोपों से घिरे रहे है। सूत्रों के अनुसार संघ ने एक से दावेदार को यहां तक कह दिया कि अगर उनपर गौर किया जा सकता था। लेकिन अब उन्हें गुजरात में स्वच्छ छवि यानि किसी भी प्रकार के दोषारोपड़ की छीटें जिस पर प पड़ी हो उन्ही पर आने वाले वक्त में गौर किया जा सकता है। संघ के अनुसार अगर उसे ऐसा नहीं करना होता तो सबसे पहले अमित शाह को सेहरा बांधा जाता।

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