चुनाव मैदान पर उतरे दबदलुओं पर वरिष्ठï पत्रकार पंकज चतुर्वेदी की टिप्पणी जो उनके फेसबुक वाल से साभार ली है।
pankaj chauturvediगजब का वैचारिक शून्‍यता का दौर है, अभी तक हर दल ने दूसरे दल से आए 78 लोगों को टिकट दिया है, जो अभी दस दिन पहले तक तोते की तरह टांय टांय कर रहे थे ,अब कुत्‍ते की तरह पूंुछ हिला रहे हैं, ना कोई वैचारिक प्रतिबद्रधता, ना आंखेां की शरम और ना ही जनता को किसी सुखद भविष्‍य का आश्‍वासन, क्‍यों ना एक दल हमारा हो दलबदलुओं को हराओ, जो लोग बीते पांच साल में किसी सार्वजनिक या राजनीतिक आयोजन में नहीं दखिे, महज ग्‍लेमर के बदले वोठ मोंग रहे हैं उन्‍हें हराओ, काश यह कानून होता कि जिस किसी उम्‍मीदवार ने अपने दल में कम से कम पांच साल पूरे नहीं किए, वह उसके चुनाव चिन्‍ह पर चुनाव नहीं लड सकता, जिस व्‍यक्ति ने चुनाव क्षेत्र में दस साल काम नहीं किया हो, निवास नहीं किया हो, तो वह वहां से चुनाव नहीं लड सकता, राजय सभा का भी , अब हेमामालिनी क्‍या मथुरा को समझेंगी, पूर्णमासी राम कैसे कांग्रेस के अनुरूप खुद को बना पाएंगे और क्‍या गुल पनाग नज संघर्ष का दर्द महसूस करेंगी ा चुनाव निहायत गैर गंभीर लोगों का दूसरा धंधा बनता जा रहाहै

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