लखनऊ। कानपुर में दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी को पहुंची पुलिस टीम पर हमले में शहीद सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र के पत्र को लेकर जांच के घेरे में आए तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीआईजी एसटीएफ अनंत देव तिवारी को मंगलवार रात को शासन ने हटाकर मुरादाबाद पीएसी भेज दिया। अभी तक वह एसटीएफ की उस टीम का हिस्सा थे जो कानपुर मुठभेड़ कांड की जांच कर रही है। मंगलवार को पत्र प्रकरण की जांच करने पहुंचीं आईजी लक्ष्मी सिंह की रिपोर्ट आने के बाद योगी सरकार ने उन्हें हटाने का फैसला किया। इससे पहले सीओ देवेंद्र मिश्र के परिजनों ने भी अनंत देव पर सवाल खड़े किए थे। इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे मामले के जांच के आदेश दिए थे।

मंगलवार को पत्र प्रकरण के पूरे मामले की जांच के लिए आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह मंगलवार सुबह बिल्हौर स्थित सीओ कार्यालय जांच के लिए भेजा गया और शाम को डीआईजी एसटीएफ अनंत देव का तबादला कर दिया गया। विवादों से घिरे डीआइजी एसटीएफ अनंत देव को हटाए जाने के साथ ही तीन और आईपीएस का तबादला किया गया है। शासन ने एसएसपी वाराणसी प्रभाकर चौधरी को हटाकर एसएसपी मुरादाबाद बनाया है। माना जा रहा है कि वाराणसी में दो दिन पूर्व भाजपा नेता व पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद की घटना को लेकर उनका तबादला किया गया है। वहीं सुधीर कुमार सिंह को एसएसपी एसटीएफ बनाया गया है।

बता दें कि बीते दिनों निलंबित आईपीएस अधिकारी वैभव कृष्ण ने पांच आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे, उनमें सुधीर कुमार सिंह का नाम भी शामिल था, जिन्हें तब जिले की पोस्टिंग से हटाकर पीएसी में भेज दिया गया था। मामले की जांच डीजी विजिलेंस की अध्यक्षता में गठित एसआईटी को सौंप दी गई थी। एसटीएफ लखनऊ मुख्यालय में लंबे समय के बाद एसएसपी की तैनाती की गई है। वर्तमान में एएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह बतौर प्रभारी एसएसपी एसटीएफ का कार्यभार संभाल रहे थे।

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी को पहुंची पुलिस टीम पर हमले में शहीद आठ पुलिसकर्मियों में से एक सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र के पत्र को लेकर तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीआईजी एसटीएफ अनंत देव तिवारी जांच के घेरे में आ गए हैं। सोमवार को यह पत्र सीओ की बेटी ने ही घर में मिली पत्रावली से निकालकर दिखाया था। यह पत्र फिलहाल किसी रिकॉर्ड में नहीं है। शक है कि इसे गायब कर दिया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह मंगलवार सुबह बिल्हौर स्थित सीओ कार्यालय जांच के लिए भेजा गया। करीब साढ़े चार घंटे तक बंद कमरे में उन्होंने दस्तावेजों का निरीक्षण किया। कई पुलिस कर्मियों से पूछताछ भी की। फॉरेंसिक टीम ने सीओ का कंप्यूटर सील करके विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा है, ताकि कंप्यूटर की हार्डडिस्क से यह पता लगाया जा सके कि यह पत्र इस कंप्यूटर से टाइप हुआ था कि नहीं।

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