सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन करके जानकारी दी कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) गलवान घाटी के वाई-जंक्शन से सैनिकों को पीछे के बेस कैंप की ओर ले जा रही है। उसी शाम, 5 और 6 बजे के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की।

बातचीत के दौरान अजित डोभाल ने पूर्वी लद्दाख में 1597 किलोमीटर लंबे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के चार प्वाइंट पर भारतीय सेना के गश्त अधिकारों को बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस मामले की जनकारी रखने वाले अवगत लोगों ने कहा, ‘सोमवार शाम तक चीन दोनों देशों के बीच गतिरोध वाले चार प्वाइंट यानी गालवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगॉन्ग त्सो से वापस जाना शुरू कर दिया। भारतीय सेना भी गलवान में अपने बेस कैंपों में लौटी। पहले गोगरा (पेट्रोलिंग प्वाइंट 15) और हॉट स्प्रिंग्स (पेट्रोलिंग प्वाइंट 17) से सैनिक वापस जाना शुरू किए। इसी दौरान चीनी सैनिक फिंगर 4 पर बनाए संरचनाओं को भी खत्म कर रहे थे।

इस घटना की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि जब तक चीनी सैनिकों की वापसी पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारतीय जवानों से कोई चूक नहीं होगी। तैनाती जारी रहेगा, क्योमकि अभी किसी भी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हालांकि ये LAC पर विस्थापन के लिए उठाए गए पहले कदम हैं। अजीत डोभाल और वांग यी इस बात से सहमत हैं कि दोनों पक्षों गतिरोध वाले बिंदुओं पर गश्ती के अधिकार होंगे, लेकिन भविष्य में किसी भी टकराव से बचेंगे। हालांकि सीमा मुद्दों पर संयुक्त सचिव-स्तरीय Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) इन फैसलों को लागू करने के लिए जल्द ही बैठक करेगी। तीन सप्ताह बाद बातचीत करने के लिए दो बैठकें निर्धारित भी हैं।’

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