विकास दुबे किस स्तर का अपराधी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने दरोगा को सीधे जान से मारने की धमकी तो दी ही। साथ ही यह भी कहा कि उसके विभाग के इतने लोगों को मारेगा कि वह गिन नहीं पाएगा। दरोगा ने एसओ को इसकी जानकारी भी दी थी पर उसकी तरफ से इसे लेकर कोई एक्शन नहीं लिया गया।

निलम्बित चौकी इंचार्ज केके शर्मा ने बताया कि जब वह कुछ दिन पहले एक मामले में बिकरू गांव गया था। तो उस दौरान विकास दुबे का उसके पास फोन आया था। उसने दरोगा से सीधे कहा था कि गांव से निकल जाओ वरना ठीक नहीं होगा। अपने थानेदार को भी समझा देना कि वह ज्यादा हवा में न उड़े। वरना इतने गिरा दूंगा की गिनना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद केके शर्मा दहशत में आ गया था। उसने पूर्व एसओ विनय तिवारी को इसके बारे में जानकारी भी दी मगर कोई एक्शन नहीं हुआ।

पुलिस मूड देखकर करती थी बात 
चौबेपुर पुलिस का हाल यह था कि वह विकास दुबे का मूड देखकर उससे बात करती थी। दुबे का मूड अच्छा होता तो वह राह चलते पुलिस वालों से हाल चाल ले लिया करता था मगर मूड खराब हो तो वह सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक वह किसी को भी धमकी दे देता था। चौबेपुर में शायद ही ऐसा कोई पुलिस कर्मी बचा हो जिसे दुबे ने धमकी न दी हो। उसके बावजूद कोई कुछ कहने को नहीं तैयार था। घटना से कुछ दिन पूर्व विकास के गुर्गों ने सिपाही को तमाचा मार दिया था। वह गांव की तरफ चला आया था महज इसी बात से गुर्गे नाराज हो गए थे।

विकास दुबे के सरेंडर की सूचना पर पुलिस अलर्ट : 

विकास दुबे के सरेंडर की सूचना पर पुलिस ने माती कचहरी की नाकेबंदी कर दी। पूरे दिन कचहरी पहुंचने वाले हर व्यक्ति पर खास नजर रही। पुलिस को आशंका थी कि किसी पुराने मामले में जमानत कटवाकर विकास सरेंडर कर सकता है। इसके साथ हाईवे पर भी वाहनों की चेकिंग की।
सोमवार सुबह से ही सीओ सदर संदीप सिंह व कोतवाल तुलसीराम पांडेय की अगुवाई में करीब 50 पुलिसकर्मियों ने कचहरी के सभी प्रवेश द्वारों की घेराबंदीकर ली थी। कुछ पुलिसकर्मी इधर-उधर कचहरी जाने वाले रास्तों पर भी तैनात थे। महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था। ड्यूटी पर लगाए गए अधिकांश पुलिसकर्मी बुलेट प्रूफ जैकेट के साथ चेकिंग कर रहे थे। सुबह से ही रायपुर और रनियां में भी पुलिस ने हाईवे पर मोर्चाबंदी कर रखी थी। सवारी वाहनों से लेकर लग्जरी वाहनों तक हर किसी को रोका गया।

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