कानपुर। कोरोना काल में बच्चों के कुपोषण का ध्यान कैसे रखा जाये इसे अगर देखना है तो कानपुर आइये और यहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देखिये। चित्र में आप देख भी सकते हैं कि कानपुर के सराय मीता आगंनबाड़ी केन्द्र की बिमलेश मिश्रा किस तरह लोगों को उनके बच्चों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए पोषाहार बांट रही हैं। इसी प्रकार अन्य आंगनबाड़ी केन्द्रों जैसे बेनाझावर बी की शशि बाला खलासी लाइन बी की चन्द्र बाला बिरहाना गीतानगर की मंजू लता दीक्षित कृषि डेयरी फार्म की परवीन, रानी घाट ए की छाया, तिवारी घाट की मधु मिश्रा,बैरी बी की प्रपशा दीक्षित, नौबस्ता की रेनू मिश्रा, बरा शिरोही की किरन शुक्ला, खलवा की रेखा गुप्ता,विजय नगर की उर्मिला निगम अम्बेडकरनगर की नीलम शुक्ला व मस्वानपुर गांव बी की रेखा सेंगर के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर भी ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। कोरोना काल में मुश्किलों से जूझती ये कार्यकत्रियां कुपोषित बच्चों का अपने परिवार के बच्चों जैसा ख्याल रख रही हैं।                                                                                                              लॉकडाउन में दिखाई सक्रियता तो अनलॉक में सुपरवाइजरों के साथ निकल पड़ी दौरे पर
आपको बताते चलें कि सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन और यहां की सीपीडीओ अनामिका सिंह के निर्देशन में ये आंगनबाड़ियां कोरोना काल में बच्चों को कुपोषण से बचाने और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए प्रयास कर रही हैं। आपको बताते चलें कि कानपुर की सीपीडीओ अनामिका सिंह बीते तीन सालों से कानपुर में कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। कोरोना काल में उन्होंने अपने घर को ही कंट्रोल रूम बना कर लॉकडाउन का पालन करते हुए सुपरवाइजर और आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को लगातार प्रोत्साहित किया था। अब लाकडाउन खुलने के बाद अनामिका ने सुपरवाइजर ललित सक्सेना, छाया शर्मा सुमन अवस्थी व उमा श्रीवास्तव के साथ आंगनबाड़ी केन्द्रों का न सिर्फ दौरा किया बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पोषाहार बांटने और कुपोषित बच्चों की देखभाल संम्बंधी जरूरी निर्देश भी दिये।
सीडीपीओ अनामिका सिंह बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में मानसून की दस्तक से अन्य प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ गया है। ऐसे मौसम में कुपोषित बच्चों की देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इस मौसम में ऐसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और उनमें संक्रमण का खतरा अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाता है। सरकार ने बुधवार से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के द्वितीय चरण की शुरुआत कर दी है। एक से 31 जुलाई तक चलने वाले स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान पर हमारा पूरा ध्यान केन्द्रित है। हमारी सभी आगंनबाडी कार्यकत्रियां कुपोषण के खिलाफ जी जान से जुटी हैं।
बच्चे को दो पोषण भरपूर, दिमाग रखो चुस्त और रोग रखो दूर
अनामिका बताती है कि उन्होंने आंगनबाडी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे प्रत्येक माह आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चे का वजन करें। बच्चे का ग्रोथ चार्ट भरें। सभी बच्चों को टीके लगवाने में सहयोग दें। बच्चों को आयरन तथा विटामिन ए की नियमित खुराक दिलाएं। दस्त होने पर जिंक, ओ आर एस उपल्ब्ध कराएं। आयोडीन नमक के प्रयोग के लिए समुदाय को प्रोत्साहित करें। हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस पर भी नजर रखेंगी कि बच्चे को क्या खिलाया जा रहा है। सही मात्रा, गाढ़ापन तथा बारम्बारता ठीक है या नहीं कितनी बार खिलाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की दिक्कत पर उन्हें समस्या की पहचान भी करनी है।

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