चीनी सैनिकों के हमले तीन भारतीय सैनिक शहीद

नई दिल्ली। चीन अपने रंग में आने लगा है। वो भारत के सब्र की परीक्षा ले रहा है। भारतीय सैनिकों के शौर्य से वह अभी तक अनजान है। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारत के तीन सैनिक शहीद हो गए हैं तो चीन के भी कई सैनिक मारे गए हैं। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की है। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय और पीएलए ने अब तक चुप्पी साध रखी है। ग्लोबल टाइम्स की चीफ रिपोर्टर ने पहले 5 सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की, लेकिन कुछ ही देर बाद कहा कि उन्होंने भारतीय मीडिया में देखने के बाद यह बात कही थी। इसके कुछ देर बाद ही, ग्लोबल टाइम्स के एडिटर इन चीफ हू शीजिन ने भी स्वीकार किया है कि झड़प में चीनी सैनिक मारे गए हैं।
गलवान घाटी में सोमवार की रात को डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया के दौरान दोनों सेनाओं की हिंसक झड़प में भारतीय सेना के अफसर और दो जवान शहीद हो गए हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की चीफ रिपोर्टर वांग वेनविन के मुताबिक, भारतीय सेना ने भी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पांच सैनिकों को मार गिराया। दोनों सेनाओं की ओर से कोई फायरिंग हुई और डंडों व पत्थरों से एक-दूसरे पर हमला किया। हालांकि, कुछ ही देर बाद वांग ने कहा कि यह बात उन्होंने भारतीय मीडिया में देखने के बाद कही।
ग्लोबल टाइम्स के एडिटर इन चीफ ने लिखा, ”जितना मैं जानता हूं गलवान घाटी झड़प में चीनी भी मारे गए हैं। मैं भारतीय पक्ष को बताना चाहता हूं कि घमंडी मत बनिए और चीन को कमजोर समझने की भूल ना करना। चीन भारत के साथ टकराव नहीं चाहता, लेकिन हम इससे डरते नहीं हैं।”
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि ऑफिशियल ग्लोबल टाइम्स अकाउंट से यह नहीं कहा गया है कि कितने चीनी सैनिक मारे गए हैं। ग्लोबल टाइम्स इस समय संख्या की पुष्टि नहीं कर सकता है। बताया जा रहा है कि डि-एस्केलेशन प्रक्रिया के तहत चीनी सेना को गलवान में पीछे जाने था। सूत्रों ने कहा कि पीछे जाने के बजाय चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की और लोहे की कीलें लगीं लाठियों से भारत की सेना पर हमला किया। भारतीय सेना ने अपने तीन सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि की है और यह भी कहा है कि चीनी सेना के भी कुछ लोग हताहत हुए हैं। हालांकि, चीन की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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