Hyderabad-blasts-NIAs-claim-baseless-alleges-Bukhariजामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी को चुनाव के समय राजनीति का बुखार चढ़ता है। इस बुखार की दवा वह कभी मुलायम की सपा में खोजते हैं तो कभी किसी और दल में। इस बुखारी को अपनी बीमारी की दवा बसपा में नजर आ रही है। यूपी में आगामी लोकसभा चुनाव में दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कोशिश के तहत दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और बहुजन समाज पार्टी बीएसपी के बीच बातचीत आखिरी दौर में है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक दोनों के साथ आने के संबंध में कोई ऐलान हो सकता है। बीते सोमवार को लखनऊ में बुखारी के तीन प्रतिनिधियों ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती के करीबी नसीमुद्दीन सिद्दीकी से मुलाकात की। इस दौरान बुखारी की ओर से बीएसपी को समर्थन करने के लिए कुछ मुद्दे रखे गए। इनमें मुसलमानों की शिक्षाए स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों के अलावा आतंकवाद के मामलों में मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी और आरक्षण जैसे बिंदु भी शामिल हैं।
बुखारी ने मंगलवार को इस बारे में कहा कि हमारी कोशिश है कि यूपी में दलित और मुसलमान एकसाथ आ जाएं। इसी को लेकर हम बातचीत कर रहे हैं। कुछ मुद्दे हमने बीएसपी के सामने रखे हैं और उम्मीद है कि पार्टी जल्द उन पर अपना जवाब दे देगी। इसके बाद हम समर्थन के संदर्भ में अंतिम फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि हमने साफ कर दिया है कि बीएसपी को समर्थन करने के लिए हमारी कोई शर्त नहीं होगी। हम सिर्फ मुसलमानों से जुडे कुछ मुद्दों पर पार्टी का नजरिया जानना चाहते हैं। उधरए बीएसपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बुखारी और उनके लोगों के साथ हमारी बातचीत आखिरी दौर में है। इस महीने के आखिर तक बुखारी की ओर से समर्थन का ऐलान हो सकता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.