धर्मेंद्र कुमार त्रिवेदी

देश मे कोरोना के दस्तक देते ही लाकडाउन की घोषणा हो गई,जिससे व्यक्तिगत,पारिवारिक, सामाजिक कार्यशैली में बदलाव आया व सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक क्षेत्रों में भी असर पड़ा।
लाकडाउन में जिन्दगी की रफ्तार थमी लगा जैसे नज़रबंद हो गयें हो आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य वस्तुएं पहुंच से दूर हो गईं सोशलडिस्टैसिंग के अनुपालन में जन्म,विवाह आदि पार्टी, पर्व,खरीदारी, मेला आदि सामाजिक उत्सव बंद रहे।कोरोना संक्रमित की मृत्यु व प्रवासी मजदूरों के कष्टकारी पलायन की खब़रे मनआहत कर देतीं थीं।
हर बड़ी घटना नये बदलाव को जन्म देती है,, लाकडाउन के कारण हुआ पलायन चाहे वो अन्तराष्ट्रीय स्तर,राष्ट्र स्तर,प्रदेश, जनपद ,मोहल्ला स्तर पर हो सबके भविष्य मे कुछ या अधिक बदले हुए परिणाम मिलेगें,,
कोरोना की दहशत अधिकान्शतः सभी की जीवनशैली में बड़ा बदलाव ला देगी,,कोरोना का दौर गुजर जाने के बाद लोगों की अभिरुचियाँ, जीवनशैली, सामाजिक गतिविधियां,यहां तक कि औधोगिक इकाइयों तक की तश्ववीरें बदली हुई होगीं,,
आगामी समय मे उन उत्पादों की तवज्जो व उत्पादन बढ़ जायेगा जो संक्रमण आदि से बचाव करतीं हैं जैसे सेनेटाइजर्स, फेस मास्क, संक्रमण से बचाने वाली क्रीम,साबुन, अगरबत्ती, या लिक्विड जैसे मच्छरों से बचाव हेतु शुरुआत मे मात्र कछुआ छाप मच्छर अगरबत्ती आया बाद मे टिकिया,लिक्विड, साउन्ड मेकर,करेन्ट वाला बैट,,,आदि आदि,,उसी तरह से नित नये आइटम संक्रमण हटाने की दावेदारी के साथ लांच होगे,,साबुन, क्रीम ,स्प्रे की बिक्री में महक आदि की जगह उसकी संक्रमण हटाने की क्षमता का आकलन प्राथमिकता से होगा,,लिपस्टिक की जगह डिजाइनर मास्क ड्रेस से मैच करते कलर वाला ज्यादा महत्वपूर्ण हो जायेगा,,
खानपान में बड़े परिवर्तन होगें स्वादिष्ट लज़ीज़ व्यंजनों की जगह इम्यूनिटी बढ़ाने वाला भोजन प्राथमिकता पर आ जायेगा,,घरेलु साफसफाई के उत्पादों में भी असर होगा और उनकी खपत पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जायेगी,,
शादी व्याह बारातों, मेला,भीड़भाड़ में जहां पहले बेखटके लोग शरीक हो जाते हैं अब भीड़ पाते ही असहज होगें और बगैर मजबूरी के खुद को भीड़ का हिस्सा नहीं बनने देगें,, फिर भी काफी कुछ संशय और अनिश्चितता के साये में रहेगा..
कोरोना बयार लाकडाउन के दौरान सबको चिकित्सा सेवा,पुलिस सेवा,सफाईकर्मी सेवा,आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई करने वालों की सेवा का महत्व व औचित्य अच्छे से समझ मे आ गया,,भविष्य मे चिकित्सा व्यवस्था में वृहद स्तर पर बदलाव मिलेंगे,, पब्लिक डीलिंग की जगह आनलाइन सेवाओं व्यवस्थाओं का वजूद व उपयोगिता बढ़ेगी,,
मजदूरों के मजबूरीवश पलायन के बाद औद्योगिक इकाइयों में बढ़ी तब्दीलियां आयेंगी,,उम्मीद है अब श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करवाकर श्रमिक हितों की अनदेखी पर लगाम लगेगी,,गांवों की ओर लौटे जनमानस में बड़ी संख्या में वे गांव या आसपास के कस्बों में रोजगार तलाशेगें अथवा खुद का कार्य करेंगे जिसमें गांवो में तकनीकी व सामाजिक बदलाव देखने को मिलेगा,और गांव उन्नत व सृदृढ़ होगें,,
शहरों पर आबादी का भार कम होने से व्यवस्थाओं की सुचारुता बढ़ेगी,,
जनमानस में शहरों की ओर पलायन की वृत्ति में बदलाव होगा,,गांवों के तमाम सूने पड़े घर व गलियारों में रौनक आयेगी,,लाकडाडन के दौरान अनेक लोगों की नौकरी दबे पांव चली गई और तमाम के खुद के रोजगार पलायन होने से हमेशा के लिए खतम
हो गये,,ये विभीषिका समाज में अनायास अनचाही अव्यवस्थाओं जैसै चोरी,राहजनी, गैरकानूनी कार्यों का ग्राफ बढ़ा सकती है,, सामाजिकता से निरंतर दूर होते रहने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा अब लोग बेहिचक एक दूसरे से संक्रमण सावधानी के नाम पर फासले बनायेंगे..
अफ़सोस रहेगा कि कोरोना से पहले तक लगातार दिलों के फासले बढ़ रहे थे कोरोना के बाद लोग तन मन दोनों से एक दूसरों से दूरियाँ बनायेंगे,, शायद ये अनचाही मजबूरियों का तक़ाज़ा होगा।

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