Lalji-Tandonलखनऊ की सीट के लिए अड़े लालजी टंडन 24 घंटे से भी कम समय में मान गए हैं। अब बता रहे हैं कि उनके राजनाथ सिंह से बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं। सूत्रों के मुताबिक खुद टंडन को अपनी सीट पर यकीन नहीं था इसलिए बार बार वह मोदी को लखनऊ सीट देने की वकालत करते रहे हैं। अटल के सहारे लखनऊ की राजनीति में पहले सरकने फिर जमने वाले श्री टंडन को आखिरकार मानना ही पड़ा। इससे पहले वाराणसी को लेकर गरमाये भाजपा सांसद मुरलीमनोहर जोशी जी का जोश किसी तरह ठंडा पड़ा तो लखनऊ में लालजी टंडन उखड़ गए। वह लखनऊ किसी भी कीमत पर राजनाथ सिंह को नहीं देंगे। वह सिर्फ नरेन्द्र मोदी के लिए ही लखनऊ छोड़ेंगे। वह पांच सालों से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की खड़ाऊ रखकर लखनऊ सम्भाल रहे हैं। बीता लोकसभा चुनाव वह किसी तरह से अटल जी की वजह से जीत गए थे पर इस बार उनकी सीट निकलना मुश्किल था। मोदी की लहर पर सवार होकर वह इस बार भी दिल्ली पहुंचना चाहते हैं इसलिए राजनाथ सिंह को वह सीट देने को कतई तैयार नहीं है।
बीजेपी नेता लालजी टंडन के एक अंग्रेजी अखबार को दिए बयान ने इस घमासान को सामने लाकर रख दिया है। वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के लचीले रुख की वजह से पार्टी में वाराणसी लोकसभा सीट को लेकर चल रही खींचतान से अभी नरम पड़ी ही थी कि लखनऊ सीट को लेकर एक बार फिर पार्टी के अंदर तकरार शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसारए लखनऊ से वर्तमान सांसद लालजी टंडन ने यह साफ कर दिया है कि वह सिर्फ पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के लिए ही यह सीट छोड़ सकते हैं और मोदी के यहां से नहीं लडऩे की स्थिति में उनकी दावेदारी पक्की है। जोड़तोड़ में माहिर और बसपा सुप्रीमो के मुहबोले भाई लालजी टंडन ने केंद्रीय नेतृत्व को साफ तौर पर यह बता दिया है कि अगर लखनऊ से मोदी चुनाव नहीं लड़ते हैं तो वह खुद इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। टंडन के इस अडिय़ल रवैये के बाद अब राजनाथ के सामने मुसीबत पैदा हो गई है। हालांकि टंडन ने हवा का रुख देख पलटी मारने की पूरी तैयारी कर ली है लेकिन शिगूफा छोड़ दिया है। अगर देश में मोदी की वजह से भाजपा मजबूत न होती टंडन जी का लखनऊ सीट से जीतना भी मुश्किल होता।

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