कानपुर में पीडि़त महिला पीसीएस अफसर को ही जांच में फंसाने की साजिश
पहले अलीगढ व फिर कानपुर में मातहतों से अश्‍लील हरकत कर ते इस डीपीओ बचाने के लिए जांच कमेटी से मुख्‍य मुद्दा ही गायब
लखनऊ से कानपुर गई टीम ने भी डीपीओ द्वारा की गई अश्‍लील हरकत पर पीडि़त से नहीं लिया लिखित बयान
कुछ अफसर योगी सरकार की छवि लगातार धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। आजम खान के चहेते अफसर को बचाने में दिन रात एक किये हुए हैं कानपुर के आला अफसर। महिला मातहतों से छेडखानी के चलते अलीगढ से खदेड़े गया आजम खान का चहेता व इस समय कानपुर का डीपीओ जफर खान तीन साल से महिला पीसीएस अफसर को लगातार प्रताडि़त करता आ रहा है। महिला पीसीएस अफसर अनामिका सिंह इसकी शिकायत कानपुर के तत्‍कालीन व वर्तमान डीएम से कइ्र बार कर चुकी हैं। यहां तक कि स्‍थानीय विधायक तक से गुहार लगाई पर नतीजा कुछ नहीं बल्कि हर आजम खान के चहेते इस डीपीओ के हौसले बढते गये। इसने सीडीपीओ अनामिका सिंह को झूठे आरोप में फंसाने की पूरी कहानी ही रच दी। कोरोना जैसी आपदा में भी इसने सुपरवाइजरों से अनामिका सिंह के खिलाफ डीएम कार्यालय का घेराव तक करवा दिया।
आजम के दुलारे अफसर को बचाने में जुटे कानपुर लखनऊ के अफसर
18 मई को तो इसे विकास भवन में महिला पीसीएस अफसर का न सिफ हाथ पकडा बल्कि उससे अश्‍लील हरकत की। बचाव करने पर महिला अफसर के जरूरी दस्‍तावेज फाड दिये। बीच बचा व में अनामिका सिंह को चोट भी लगी और जब उन्‍होंने इस डीपीओ के खिलाफ तहरीर भी दी लेकिन आला अफसरों के दुलारे इस डीपीओ के खिलाफ एफआइ्आर तक द र्ज नहीं की गई । कानपुर के डीएम पूरी शिकायत लिखित रूप में दी उस पर जांच के लिए कमेटी बना दी। कमेटी मात्र लीपापोती का दस्‍तावेज बन कर ही रह गया क्‍योंकि विशाखा गाइड लाइन के अनुसार आरोपी जांच प्रभावित न कर सके इसके लिए कार्यालय आने पर रोक लगाई जानी चाहिए पर ऐसा हुआ नहीं। जांच के लिए बनी कमेटी में जिस पर पीडि़त आरोप लगाती रही है उसे जांच कमेटी में शामिल किया गया है। इसके बाद लखनऊ से कानपुर गई टीम ने डीपीओ द्वारा पीसीएस अफसर के शोषण की बात ही नहीं की और न ही लिखित बयान लिए।
अलीगढ और कानपुर में कई मातहत हुए हैं इसके शिकार
अलीगढ में आंगनबाडी कार्यकर्ता के शोषण के खिलाफ चल रही जांच
अलीगढ में आंगनबाडी कार्यकत्री निधि शर्मा का केस कोर्ट में चल रहा है। अखबार की कटिंग गवाह हैं इस डीपीओ की काली करतूत के। जिसमें आंगनबाडी कार्यकर्ता को न्‍याय नहीं मिला। लखनउ से व रदहस्‍त पाप्‍त इस डीपीओ ने कानपुर ज्‍वाइन करते ही फिर अप नी गंदी हरकतों को विस्‍तार देना शुरू कर दिया। अनामिका सिंह से पहले दो सीपीडीओ और एक एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को निशाना बनाया है। आश्‍चर्य की बात ये है कि आजम के चहेते इस अफसर को बचाने के पीछे उनकी मंशा क्‍या है।

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