शोषण की वीभत्‍स कहानी है पीसीएस अनामिका प्रकरण
न्‍यूज नेटवर्क 24 ब्‍यूरो
अनामिका सिंह बाल विकास परियोजना अधिकारी शहर द्वितीय कानपुर नगर में तेनात हूं। जुलाई 2017 डीपीओ श्री जफर खान ने कानपुर नगर का कार्यभार संभाला था। महोदय कुछ ही दिनों के बाद उनकी बदनीयती सामने आने लगी थी। गंदे कमेंट करना आंखों से गंदे तरीके से देखना जिससे मैं घबरा जाती थी। कई बार अकेले में पा कर मुझे काम करने के लिए बरगलाते कहते कि तुम माडर्न हो जवान हो। ये सब गलत नहीं होता। एक बार मेरी बात मानकर देखो। तुमको काम करने की कोई जरूरत नहीं बस तुम मेरे साथ रहो।
मैं डीपीओ जफर खान की इन हरकतो से डर गई थी और अपने बचाव में विकास भवन जाना छोड़ दिया था। कभी जाना होता था तो किसी न किसी को साथ ले कर जाती थी। इसके बाद इन्‍होंने लिखा पढी में परेशान करना शुरू कर दिया। मैं पांच बजे कार्यालय से जैसे घर पहुंचती वैसे ही 5:20 या 5:30 पर इनका यानी डीपीओ श्री जफर खान का फोन आ जाता कि जिलाधिकारी की बैठक है तुरंत वहां पहुंचो। जब मैं वहां पहुंचती तो पता चलता कि वहां मेरी आवश्‍यकता ही नहीं थी इन्‍होंने मुझे सिर्फ प्रताडि़त करने के लिए बुलाया था। कई बार सुबह 8 बजे या कहूं 8:30 पर इनका यानी डीपीओ श्री जफर खान का फोन आ जाता कि तुरंत फील्‍ड यानी केन्‍द्र पहुंचो। तुम्‍हारे केन्‍द्र को डीएम व सीडीओ सर चेक करेंगे। लेकिन ऐसा वास्‍तव में होता नहीं था। डीपीओ महोदय इसी तरह परेशान कर के अपनी बदनीयती को न मानने का अंजाम दिखाते थे।
जब मैं नहीं झुकी तो मुख्‍य सेविकाओं को मेरे खिलाफ भड़काया
जब डीपीओ जफर खान सर को सफलता नहीं मिली तो उन्‍होंने मेरे खिलाफ मुख्‍य सेविकाओं को संरक्षण देना प्रारंभ कर दिया और उनसे मेरे कार्यालय के काम में बाधा डालने लगे इससे मेरी कार्यालय सूचना बाधित होने लगी। मैं उसके बाद भी सूचना बना कर प्रेषित करती तो पत्रवाहक व लिपिक के द्वारा वहां लेने से मना करवा दिया जाता था। आप को बताते चलें कि श्री जफर खान महोदय ने अपनी टीम बना रखी है जिसके सामने स्‍वतंत्र हो कर कुछ भी बोल देते हैं चाहे वो कितनी भी अश्‍लील भाषा हो या अश्‍लील हरकत। उनकी टीम में चपरासी व क्‍लर्क से ले कर संविदा पर तैनात सीपीडीओ भी शामिल है। मेरा तमाशा बनाकर इन्‍होंने कई बार सबके सामने रुलाया भी है।
मैंने डीएम और विधायक मे से की शिकायत पर डीपीओ का कुछ नहीं हुआ
मैने इसकी शिकायत पूर्व जिलाधिकारी महोदय सुरेन्‍द्र सिंह जी से भी की थी लेकिन शर्म की वजह से इनके अश्‍लील इरादों को नहीं बता पाई बस मैने अन्‍य परेशान करने वाली बातों को बताया उसके बाद डीपीओ सर को फटकार भी लगाई गई थी। इसके बाद भी इनकी बदनीयती में सुधार नहीं आया तो किदवई नगर के विधायक महोदय श्री महेश त्रिवेदी जी को जानकारी दी कि डीपीओ जफर खान परेशान करता है इस पर माननीय विधायक महोदय ने ज फर खान को फोन पर डांटते हुए अपनी हरकतें सुधार लेने को कहा। विधायक की डांट का डीपीओ जफर खान पर कोई असर नहीं हुआ और उसने कुछ दिन बाद फिर से वहीं हरकतें शुरू कर दी।
पीसीएस अफसर से डीपीओ बोला जिंदगी कैसे बरबाद की जाती है ये मैं बताऊंगा
इनके कार्यकाल की एक भी आख्‍या नहीं मिली जिसको लेकर इन्‍होंने हमेशा दबाव बनाया। जब मैं इनके दबाव में नहीं आई तब इन्‍होंने कहा कि तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। तुम एक मामूली सीडीपीओ हो मैं डीपीओ जफर खान हूं मैं तुम्‍हारी एडवर्स एंट्री करूंगा जिंदगी कैसे बरबाद की जाती है ये मैं तुम्‍हारी कर के दिखाऊंगा। डीपीओ द्वारा मुझे परेशान करने के कई तरीके हैं जिसमें से एक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय है जो जिला कार्यक्रम अधिकारी की लापरवाही और जानबुझ कर न बनाना है । उसके इस कार्य में मुख्‍य सेविका ने भी साथ दिया। इस मानदेय प्रकरण के सहारे नाटकीय ढंग से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मेरे खिलाफ बरगला कर उनसे मेरे खिलाफ शिकायत करवाई गई। य हां तक कि इस आपदा काल में जिलाधिकारी महोदय के आवास तक का घेराव करवाया गया। इतना ही नहीं डीपीओ महोदय ने मुख्‍य सेविका श्रीमती प्रशंसा विक्रम सिंह को पूरा स रंक्षण दिया जो अपने अपने आठ माह के कार्यकाल में मात्र 4 से पांच बार ही अपने परिक्षेत्र गई हैं। इनको आधार बनाकर कइ्र बा र परोक्ष रूप से मिलने का दबाव बनाया गया फिर भी मैं नहीं ग ई और अपने कार्यालय से पत्राचार किया। विकास भवन के सीसीटीवी कैमरे में देखा जा सकता है कि मैं वहां शायद ही जाती हूं।
दिनांक 16 /5/20 को कार्यालय की अन्‍य मुख्‍य सेविका को पत्रांक c-93 में चेतावनी भरे शब्‍दों का प्रयोग करते हुए पत्रांक c-89 दिनांक 14 /5/20 का हवाला दिया कि उनको अधोहस्‍ताक्षरी पर तथाकथित अनियमितताओं के लिए गवाही देनी है अगर वो लोग समय पर नहीं आई तो वह स्‍वयं। जिम्‍मेदार होंगी और गवाही का समय दिनांक 18/5/2020 तय किया गया। हैरत की बात यह कि सभी सेविकाओं ने कहा कि उन्‍हें c-89 पत्र मिला ही नहीं। महोदय मेरे ही खिलाफ जांच चल रही और मुझे ही कोई जानकारी नहीं और न ही इस संबंध में मुझे कोई पत्र ही मिला। क्‍या मुझे अपने बारे में चल रही जांच के जानने का हक नहीं या मेरा पक्ष बिना सुने ही जांच पूरी हो जायेगी। ये किस प्रकार का नियम डीपीओ महोदय ने बनाया है।
मैने वर्तमान डीएम सर को सब कुछ बताया पर डीपीओ के हौसले बढते ही गये
लॉकडाउन के प्रथम चरण में मैं जिलाधिकारी सर के पास डीपीओ द्वारा लगातार परेशान करने अश्‍लील हरकत करने की शिकायत व डीपीओ द्वारा सरंक्षण प्राप्‍त मुख्‍य सेविका श्रीमती कुसुम सैनी लगातार बढ़ती मनमानी की शिकायत पत्रांक c-333 के साथ आवश्‍यक संलग्‍नक लेकर गई थी। जिलाधिकारी महोदय ने आश्‍वासन दिया था कि तुम्‍हारे साथ कुछ गलत नहीं होगा। डीपीओ तुम्‍हारे साथ कुछ गलत नहीं कर पायेगा। तुम खुश होकर अपना काम करो साथ ही डीएम सर ने मेरे कार्यो की सराहना भी की। डीएम सर से आश्‍वासन मिलने के बाद मैं सुरक्षित म हसूस कर रही थी लेकिन मन में कहीं न कहीं डर भी था कि क्‍योंकि मैंने सालों डीपीओ जफर खान की प्रताड़ना सही थी जिसे दो लाइनों में नहीं कहा जा सकता।
डीपीओ ने जबरन मेरा हाथ पकड़ा और फिर सब्र का बांध टूट गया मेरी एफआइआर नहीं दर्ज हुई
दिनांक 18/5/2020 को मैं अपनी गोपनीय आख्‍या इनक्रीमेंट सूचना प्रार्थनापत्र के साथ कई जरूरी सूचनायें लेकर विकास भवन गई थी उसने मुझे अ केला पाकर मेरे सारे डाक्‍यूमेंट व जरूरी दस्‍तावेज फाड़ दिये और उसके बाद कहा कि तुम मेरे दिल के अरमान पूरे कर दो तुम्‍हारा सारा काम हो जायेगा और अपनी यौन आकांक्षा के कार ण मेरा हाथ पकड़ा और शारीरिक बल का प्रयोग किया जिससे मुझे चोटें आई। किसी तरह मैं हाथापाई कर खुद को छुड़ाते हुए किसी तरह बच कर बाहर निकली।
पूरे पांच बार मेरे काम को ही स्‍थान मिला
मेरे काम को आईसीडीएस ICDS में सभी ने देखा है। पिछले वर्ष में पूरे उत्‍तर प्रदेश से पोषण दर्पण पत्रिका में एक नहीं पूरे पांच बार मेरे काम को ही स्‍थान मिला कानपुर को स्‍थान मिला। मेरे सा थ जो अत्‍याचार हुआ है उसमें मुझे न्‍याय दिलाया जाये। डीपीओ जफर खान को उनके पद से हटाकर निष्‍पक्ष जांच उच्‍चस्‍तरीय कमेटी से कराई जाये। मेरा अपने अफसरों से निवेदन है कि जांच डीपीओ जफर खान की घिनौनी हरकतों की कराई जाये साथ ही इनके द्वारा अन्‍य प्रकरणों की भी जांच हो ताकि मुझे न्‍या मिल सके और मैं सुरक्षित हो कर मन लगाकर अपना काम कर सकूं। डीपीओ जफर खान बहुत ताकतवर अफसर हैं वो अपनी टीम के साथ मिलकर जांच प्रभावित कर सकते हैं। आपसे अनुरोध है कि इनके पूरे कार्यकाल की जांच हो ताकि यह सामने आ सके कि इनके द्वारा काम लिया जाता है या शोषण किया जाता है।

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