समाजवादी पार्टी की विधान परिषद सदस्य लीलावती कुशवाहा ने में कहा कि लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों घर वापसी को लेकर सरकार का हर दावा खोखला साबित हो रहा है लॉकडाउन के दौरान यदि प्रवासी मजदूरों को सरकार के द्वारा अगर भोजन, पानी उपलब्ध कराया जाता तो आज दर-दर भटक रहा मजदूर भूख प्यास से तड़प न रहा होता मजदूरों के पैर में छाले पेट में दाने तक नहीं है। श्रीमती कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि सरकार अपनी संकीर्ण मानसिकता को बदलें और मजदूरों के प्रति सहानुभूति पूर्वक उनको उनके घर तक पहुचाये दिखावे की राजनीति करना बंद करे भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सत्ता की भूखी है कोई भी संयंत्र करके सत्ता में बने रहना चाहती हैं क्या वह दिन मजदूरों को याद करना चाहिए जब वोट नहीं पड़ा था तो देश के प्रधानमंत्री  सफाई कर्मी मजदूरों का पैर धूल रहे थे और अब सत्ता मिल गई तो करोना जैसी महामारी पूरी दुनिया में फेल कर तबाही मचा रखी है आज अपनी भूख प्यास और अपनी जान की परवाह किए बैगैर घर वापसी करने को मजबूर है पता नहीं कितने मजदूर भूख से मर गए, मजदूर ट्रकों से चलने को मजबूर है , पैदल चलने को मजबूर है पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार समय रहते पहले मजदूरों को घर वापसी कराते उसके बाद लॉक डाउन करती तो बहुत लोगो की जान बचायी जा सकता था लेकिन आज उनके पास ना तो पैसा रह गया और नहीं खाने का सामान रह गया घर वापसी के नाम पर मजदूरों को इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। श्रीमती कुशवाहा ने आगे कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मानवता के पुजारी और गरीबों मजदूरों के मसीहा के रूप में एक मिसाल कायम करते हुए उन्होंने एक एक लाख रुपये मृतक परिवारों को दिया है।

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