अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि इस वर्ष हुए बीजिंग-वाशिंगटन के बीच हुए व्‍यापार सौदे की स्‍याही सूखी भी नहीं थी कि चीन का यह कारनामा सामने आया है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि दुनिया भर में घातक कोरोना वायरस चीन से आया है। इसके प्रसार के लिए चीन पूरी तरह से जिम्‍मेदार है। उन्‍होंने कहा कि हम इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। राष्‍ट्रपति ट्रंप ने उक्‍त बातें मिशिगन में अफ्रीकी-अमेरिकी नेताओं की वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के दौरान कही। उधर अमेरिका में कोरोना का कहर जारी है।  गुरुवार को अमेरिका में कोरोना वायरस से 94 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। देश में अब 16 लाखलोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

चीन के खिलाफ क्‍या कार्रवाई करेंगे, नहीं दिए संकेत 

राष्‍ट्रपति ट्रंप लगातार कई सप्‍ताहों से चीन से झुब्‍ध हैं और कोरोना प्रसार के लिए दोषी ठहरा रहे हैं। उन्‍होंने एक बार फ‍िर कहा कि चीन ने कोरोना वायरस की अहम जानकारी दुनिया को छिपाया, जिसके चलते यह महामारी पूरी दुनिया में फैल गई। चीन की इस गलती को माफ नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस मौके पर उन्‍होंने यह संकेत नहीं दिया कि चीन के खिलाफ क्‍या कार्रवाई करने वाले हैं। उसे क्‍या दंड देंगे। उधर, चीन ने देश में जंगली जानवरों के मांस खाने या उसकी ब्रिकी पर रोक लगा दिया है। चीन में जंगली जानवरों के किसी तरह के व्‍यापार पर रोक लगा दी गई है।

चीन के खिलाफ अमेरिका के जोरदार तर्क 

इस बीच रिपब्लिकन नेताओं ने कहा कि कोरोना वायरस के लिहाज से दिसंबर और जनवरी का महीना काफी अहम था। उस वक्‍त चीन ने वारयरस के मानव संचरण की बात को छिपाया। चीन ने इस तथ्‍य को छिपाया कि यह वायरस मानव से मानव में फैल रहा है। इतना ही नहीं अमेरिका ने जब चीन की मदद के लिए अपने विशेषज्ञों को बीजिंग भेजने को कहा तो वह इस पर राजी नहीं हुआ। चीन ने चिकित्सा विशेषज्ञों के प्रवेश से इंकार कर दिया। उस वक्‍त चीन कोरोना वायरस से उत्‍पन्‍न खतरे को पूरी तरह से भांप चुका था, लेकिन उसने दुनिया से वायरस की सच्‍चाई छिपाई।

इस दौरान चीन ने मास्‍क, गाउन और अन्‍ज जीवन रक्षक रक्षक पीपीई जैसे चिकित्‍सा आपूर्ति की जमाखोरी की। इस अवधि के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सर्जिकल मास्क, गाउन और दस्ताने का निर्यात किया गया। एक बात और इस अवधि के दौरान चीनी अधिकारियों ने वुहान से बीजिंग और शंघाई जैसे अन्य चीनी शहरों के लिए घरेलू उड़ानों को सीमित कर दिया था, लेकिन चीन की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बनाए रखने के लिए आग्रह किया था।

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