कोरोना वायरस के संक्रमण काल में भी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमला जारी है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाया है कि योगी आदित्यनाथ सरकार प्रवासियों की वापसी में रोड़ा अटका रही है। प्रदेश की सीमा से उनको प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। लाखों की संख्या में लोग बार्डर पर एकत्र हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार का आदेश है प्रवासियों को उत्तर प्रदेश की सीमा में नहीं घुसने देंगे। न रेल ट्रैक पर चलने देंगे, न तो इनको ट्रक-दुपहिया से जाने देंगे। उन्होंने कहा कि इससे तो अच्छा हो कि सरकार गरीब की जिंदगी पर ही रासुका लगा दे। उन्होंने कहा कि दतिया, झांसी, जालौन, कानपुर, गाजियाबाद के साथ सहारनपुर की सीमाओं पर इनका संघर्ष इस बात का गवाह है कि उत्तर प्रदेश सरकार को यह लोग मंजूर नहीं हैं। कोरोना वायरस संक्रमण में तबाही के शिकार श्रमिकों का कसूर क्या है।

अखिलेश यादव ने कहा कि वहां पर इनको ऐसे रोका जा रहा है जैसे कि राज्य की सीमाओं पर कोई विदेशी हमला होने वाला है। ऐसा तो बेगानों के साथ भी दुव्र्यवहार नहीं होता। क्या अपने राज्य के कामगार विदेशी है। उन्होंने कहा कि उन्नाव में सड़क जाम है, प्रशासन ने वहां दस-दस किलोमीटर का जाम क्यों लगाया है। जिससे कि परेशान और अधिक परेशान हो जाए। अब तो इसका जवाब तो टीम-इलेवन को देना पड़ेगा। अमीरों की इस सरकार ने अब तो श्रम कानूनों का रक्षा कवच भी छीन लिया है। प्रशासन की पंगुता से जैसी अफरातफरी मची है पहले कभी नहीं थी।

अखिलेश यादव ने कहा कि समाज में दूरी पैदा करने वाली भाजपा का ध्यान कोरोना नियंत्रण और गरीब को रोजी-रोटी पर नहीं है। भाजपा का ध्यान अपनी चुनावी चालों पर है। अब इस पीड़ा और कष्ट को श्रमिक कभी भूल नहीं पायेगा। श्रमिकों पर तो दोहरी मार पड़ी है, एक कोरोना और दूसरी भाजपा सरकार का आचरण। देश का मजदूर और कामगार बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। अखिलेश ने कहा कि बे-सहारों पर लाठियां बरसाई जा रही है, यह घोर अमानवीय कृत्य है। इस संकट का जिम्मेदार कौन है? आखिर 54 दिन से केंद्र और राज्य की सरकारें क्या करती रही। यह लोकतंत्र के साथ भद्दा मजाक है। 1947 के बाद भारत में ऐसी स्थिति कभी नहीं आयी। जिनसे न्याय की उम्मीद है वही सरकार अन्याय और असहनीय पीड़ा पहुंचा रही है।

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