यूं तो किसी भी सरकार के लिए शुरुआती तीन से छह महीने का समय हनीमून पीरियड होता है, यानी राहत होती है। लेकिन कोरोना काल के मध्य में मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान के लिए यह काल बहुत दबाव भरा था। एक महीने तक उन्हें कैबिनेट विस्तार तक का वक्त नहीं मिला। कोरोना मरीजों की संख्या के मामले में राज्य अग्रणी पांच राज्यों की सूची में शामिल है। लेकिन भरोसा है कि स्थिति बदलेगी और मध्य प्रदेश सबसे आगे दौड़ने वाले राज्यों में शामिल होगा। दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से बातचीत के अंश:

सवाल : आप चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं। आपकी छवि को देखते हुए माना जा रहा था कि आप कोरोना को नियंत्रित करने में सफल रहेंगे। लेकिन यह कुछ ज्यादा बड़ी चुनौती साबित हो रही है?

जवाब : हम पूरी दृढ़ता के साथ इस संकट का मुकाबला कर रहे हैं। पद ग्रहण करने के बाद से ही मैं लगातार इस कार्य में जुटा हुआ हूं। मध्यप्रदेश इस आपदा से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत के साथ लड़ रहा है।

यह वायरस छापामार लड़ाई करता है तथा तेजी से फैलता है। थोड़ी सी असावधानी हमें भारी पड़ी सकती है। अत: हम सभी को पूरी सावधानी और सजगता रखनी है। प्रदेश में कोरोना की स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। अब जितने नए प्रकरण कोरोना के मिल रहे हैं उनसे कहीं ज्यादा लोग स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।

सवाल : केंद्र को कोरोना मामले में टीम भेजकर हस्तक्षेप करना पड़ा। क्या यह आपके लिए चुनौतीपूर्ण नहीं था?जवाब : देखिये यह दृष्टिकोण का अंतर है, केंद्र द्वारा भेजी गई टीम हमें सहयोग करने के लिए यहां आई थी, ना कि हस्तक्षेप करने, हमें केंद्रीय दल के अनुभव का लाभ मिला है। केंद्रीय दल द्वारा कोरोना संकट से निपटने के हमारे प्रयासों को सराहा गया है। कृषि उपज के उपार्जन के लिए हमारे नवाचार ‘सौदा पत्रक’ व्यवस्था को भी सराहा गया है।

सवाल : इस बार लॉकडाउन ज्यादा खुला खुला होगा लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले में ज्यादा आ रहे हैं। क्या आपका राज्य इसके लिए तैयार है?

जवाब : कोरोना से हारना नहीं है बल्कि जिद, जुनून और जज्बे के साथ इससे लड़ना है और आगे बढ़ना है। पूरे देश के साथ मध्य प्रदेश भी मजबूती से बढे़गा। हां, यह सच है कि लॉकडाउन में इस बार राहत रहेगी। प्रधानमंत्री ने राज्यों से रिपोर्ट देने को कहा था। हमने भी सभी स्तर पर विरोधी दलों, उद्योगपतियों, पत्रकारों आदि से बात कर इसकी नीति बनाई है। कंटेनमेंट जोन को छोड़कर बाकी स्थानों पर सभी गतिविधियां शुरू होंगी। हमारी कोशिश तो यह है कि जल्द से जल्द मध्य प्रदेश को कोरोना मुक्त किया जाए। पूरा प्रदेश लॉकडाउन से बाहर होगा। जनता भी सहयोग कर रही है, सरकार भी प्रयासरत है।

सवाल : आपने श्रम सुधार तो किए लेकिन क्या नहीं लगता है कि पुराने उद्योगों को भी और राहत मिलनी चाहिए?

जवाब : देखिए, बंद आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए श्रम सुधारों को लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। आपने पुराने उद्योगों की बात की है तो हमने समय समय पर श्रम कानून में बहुत बदलाव किए हैं। हमारी श्रम नीति पूरे देश में सबसे अच्छी है। उद्योग जगत ने उसे सराहा भी। फिलहाल नए निवेश को आकर्षित करने के लिए, मध्य प्रदेश को उनके लिए सबसे सटीक राज्य बनाने के लिए फैसला किया गया है

उद्योगों को लेकर हमने कई सहायता प्रावधान किए हैं हमने औद्योगिक प्रतिनिधियों से भी कहा है कि आपके सहयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था बहाल होगी। हम राज्य के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ निरंतर चर्चा में हैं। मुझे विश्वास है एक बार हम संकट से बाहर निकले तो फिर आगे ही दौड़ेंगे।

सवाल : अलग-अलग राज्यों में शराब पर अतिरिक्त कर लगाया जा रहा है। क्या मध्य प्रदेश में भी ऐसा होगा?जवाब : कोरोना के विश्वव्यापी संकट ने अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है। यह एक संवेदनशील और आवश्यक विषय है। राज्य को इस कोरोना संकट के चलते बड़ा आर्थिक नुकसान भी हुआ है। मध्यप्रदेश की स्थितियों को समझते हुए हम इस विषय पर भी लगातार विचार विमर्श कर रहे हैं। जो भी निर्णय प्रदेश हित में होगा वह लिया जाएगा, जिसके बारे में हम आपको अवश्य सूचित करेंगे।

राजनीतिक स्तर पर देखा जाए तो अभी तक आप मप्र भाजपा के इकलौते ऐसे नेता रहे हैं जिनको फैसले लेने की पूरी छूट रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने के बाद क्या माहौल कुछ बदला है?

जवाब : भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा संगठन है जहां सभी निर्णय लोकतांत्रिक आधार पर लिए जाते हैं। जनसेवा और इसके लिए समर्पण ही हमारा लक्ष्य है। हम इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास के मंत्र के साथ अपना कार्य करती है। यहां किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा परिवार का हिस्सा हैं। इस संकट काल में वह और उनके अन्य साथी इस युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर हमारे साथ संघर्ष कर रहे हैं। जहां तक माहौल बदलने की बात है तो यह प्रसन्नता का विषय है कि उनके जैसा उर्जावान नेतृत्व अब हमारे साथ है। निश्चित रूप से उनके कार्यानुभावों से हमारी कार्य क्षमता में और भी वृद्धि होगी।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.