यूपी में कोरोना वायरस की रफ्तार में कुछ कमी आई है। शुरुआत में पांच दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही थी। जो अब बढ़कर 14 दिन हो गई है। यही नहीं जिन जिलों में शुरुआत में बहुत ज्यादा संख्या में मरीज आ रहे हैं। उनकी में कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग ने स्थिति सुधारने में मददगार साबित हो रहा है।

यूपी में के दूसरे सप्ताह से मरीजों के लिए मिलने का सिलसिला शुरू हुआ था। 14 मार्च को यूपी में 12 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले थे। उसके बाद 31 मार्च तक प्रदेश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 104 पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक यहां से कोरोना ने रफ्तार पकड़ी। सबसे ज्यादा आगरा व नोएडा में कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ी।

चार दिन
चार अप्रैल तक 234 लोग संक्रमण की जद में आ गए। यानी चार दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई। कोरोना का कहर यहीं नहीं थमा। वायरस को रोकने की सारी कोशिशें नाकाम साबित होने लगी। नौ अप्रैल यानी पांच दिन में कोरोना मरीजों का ग्राफ 410 तक पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने कड़ी मशक्कत की।

सात दिन
लॉकडाउन और हॉटस्पॉट के नियमों को सख्ती से लागू किया। वायरस पर लगाम कसी गई। नतीजतन सात दिन यानी 16 अप्रैल को आंकड़े दोगुने होकर 805 पर पहुंचे।

14 दिन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 24 अप्रैल तक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1621 थी। अब आठ मई यानी 14 दिन में आंकड़े दोगुने के करीब पहुंचे हैं। शुक्रवार तक कोरोना मरीजों के आंकड़े 3145 तक पहुंचे।

नए जिलों में संक्रमण से बढ़ी चिंता
अधिकारियों का कहना है कि कोरोना के प्रसार की रफ्तार जरूर कुछ धीमी पड़ी है। मई में दो दिन तो लखनऊ में कोई नया मामला सामने नहीं आया। चिंता की बात यह है कि अब नए जिलों या स्थानों में संक्रमण शुरू हुआ है। इस पर काबू पाने की रणनीति बनाई जा रही है। ताकि नए जिले या हॉटस्पॉट की संख्या को बढ़ने से बचाया जा सके।

ये करें उपाए
सर्दी-जुकाम, बुखार के रोगी मास्क जरूर लगाएं
सामान्य लोग भी मास्क लगाकार ही काम पर निकलें
घर में हैं तो समय-समय पर साबुन से हाथ धोएं
बाहर हैं तो सैनेटाइजर से हाथों की सफाई रखें
इस्तेमाल ग्लब्स व मास्क खुले में न फेंके
सेंट्रल एसी चलाने से बचें
ठंडी वस्तुओं के सेवन से बचें
हाथ मिलने के बजाए नमस्ते कर अभिवादन करें।

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