कोरोना रियल एस्टेट में काम करने वाले देश के करीब 7 करोड़ मजदूरों की रोजी रोटी निगल गया है। इन 7 करोड़ लोगों की वजह से देश के करीब 35 करोड़ आबादी का जीवन यापन हो रहा था। अकेले यूपी के 1.40 करोड़ मजदूरों की रोजी रोटी छिन गई है। कन्फेडरेशन ऑफ रियल स्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने केंद्र व राज्य सरकार को वर्तमान स्थिति से अवगत करा दिया है।

कोरोना संक्रमण के बाद देश में हुए लॉकडाउन ने रियल एस्टेट सेक्टर को बुरी तरह झकझोर दिया है। पहले से ही यह सेक्टर आर्थिक मंदी व नोटबन्दी की मार से नहीं उबर पाया था अब कोरोना ने इसे आईसीयू में पहुंचा दिया है। भले ही सरकार ने कुछ शर्तों के साथ रियल एस्टेट को शुरू करने की मंजूरी दे दी है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं अब इतनी जल्दी इसके उबरने की उम्मीद नहीं है।

क्रेडाई ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को जो रिपोर्ट भेजी है वह आगे की भयावहता की और भी इशारा कर रही है। उसने इस सेक्टर के ठप होने की वजह से देश के करीब 7 करोड़ मजदूरों व अन्य का रोजगार जाने की बात कही है। इन लोगों के घरों को इसी से रोटी के साथ पढ़ाई लिखाई व दवाई भी मिल रही थी। लेकिन अब उनका सहारा सरकार को बनना पड़ेगा।

अब रुकने को तैयार नहीं हैं मजदूर
क्रेडाई के कई सदस्यों व बिल्डरों ने बताया कि जो मजदूर पलायन कर गए थे वह तो गए ही थे जो बचे थे वह भी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रेजिडेंट इलेक्ट रमनदीप सिंह बताते हैं कि मजूदर अपने गांव की तरफ भाग रहे हैं। वह किसी भी हालत में नहीं रुका चाहते हैं। वह बताते हैं कि नोएडा में कई बड़े बिल्डरों ने मजदूरों के खाने-पीने रहने तथा उनके मनोरंजन का भव्य इंतजाम किया है। इनके बावजूद वह नहीं रुक रह हैं।

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