लखनऊ। विश्व अस्थमा दिवस सम्पूर्ण विश्व में अस्थमा के विषय में जागरूकता बढाने के लिये प्रतिवर्ष मई माह के प्रथम मंगलवार को मनाया जाता रहा है जो कि 5 मई 2020 को निर्धारित किया गया था। परन्तु कोरोना-19 विश्व महामारी को देखते हुए इसका वैश्विक आयोजन स्थगित कर दिया गया है। विभागाध्यक्ष डाॅ. वेद प्रकाश द्वारा इनेक्ट्रनिक माध्यमों से लोगो से जुडकर जागरुक करने के लिये संदेश दिये गये है। अस्थमा से होने वाली मृत्यु की बढती संख्या को देखते हुए, इस बार का विषय रखा गया है।
अस्थमा या दमा फेफड़ों की एलर्जी से होने वाली बीमारी है। प्रदूषण की वजह से विश्व भर में दमा के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में 339 मिलियन लोग दमा से प्रभावित है। विश्व के 10 प्रतिशत (लगभग 15-20 मिलियन) और भारत की कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत आबादी दमे से पीड़ित है।
5 से 11 वर्ष की आयु के लगभग 10-15:  बच्चो में अस्थमा पाया जा रहा है।
प्रमुख लक्षण-
रोगी की श्वास फूलना ।
खांसी आना।
मरीज के सीने में कसाव व दर्द महसूस होना।
बच्चो में अस्थमा का महत्वपूर्ण लक्षण सुबह या रात में खांसी/श्वांस फूलना/पसली चलना है।
अस्थमा होने के कारण –
अस्थमा की बिमारी मे फेफड़ो की श्वांस की नलियों मे सूजन आ जाती है। सूजन के कारण श्वास की नलियाॅ सिकुड जाती है। अस्थमा के रोगियो के फेफड़े अतिसंवेदनशील होते है।
अस्थमा के अटैक के लिये जिम्मेदार कारक –
परागकण,
फंफूदी
धूल कण
ठंड/ठंडी हवा
तिलचटटे
घर में साफ सफाई के समय उड़ने वाले कण
घरो मे बिछाये जाने वालो गद्दो, सोफा, कार्पेट मे पाये जाने वाले किटाणु श् क्नेज डपजमेश्ण्
पालतू जानवरों के स्पर्श ( जानवरों के फर)
सिगरेट का धुंआ
बचपन में बार-बार होने वाले श्वांस के संक्रमण
विभिन्न खाद्य पदार्थ
हवा का प्रदूषण
रसायनिक तत्वो/दवाईयों से सम्पर्क
भावनात्मक तनाव
कभी कभी कुछ मरीजो में अत्याधिक व्यायाम अस्थमा के अटैक के कारण हो सकते है।
अस्थमा की पहचान – 
अस्थमा की पहचान मरीज द्वारा बतायें गये लक्षणों के आधार पर।
चिकित्सक द्वारा छाती के परीक्षण द्वारा।
अस्थमा का सही पता लगाने के लिये कम्प्यूटराईज्ड पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट अत्यंत उपयोगी है।
एलर्जी टेस्ट, स्किन प्रिक टेस्ट (सर्जिकल टेस्ट) के द्वारा विभिन्न प्रकार के एर्लजेंस जो कि दमा के कारक है को पहचानने में मदद मिलती है।
अस्थमा से बचाव एवं उपचार – 
एलर्जन के सम्पर्क मे ना आने के लिये यथा सम्भव प्रयास किया जाना चाहिये। अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नही किया जा सकता है। अस्थमा को पूर्ण रूप से नियंत्रित करके सक्रिय एंव सामान्य जिंदगी जी सकते है। अनुसंधानो से यह तथ्य सिद्व हो चुका है कि सूजन कम करने वाली दवाये एंव श्वंास नलियो से फैलाने वाली दवाआंे से अस्थमा पर नियंत्रण एंव अस्थता अटैक को रोका जा सकता है। दवांये श्वांस की नली की सिकुड़न खत्म करने वाली दवाओं की तुलना मे अधिक कारगर है और इन्हे लम्बे समय तक इंहेलेशनल थिरेपी के रूप में लिया जा सकता है। आज के समय में इंहेलेशनल थिरेपी सबसे सुरक्षित एवं बेहतरीन तकनीकि है। इसमें दवाईयाॅं सीधे फेफड़ों मे पहुँचती  है और तुरंत असर करती है। इनहेलर के जरिये दवा लेने से शरीर  के अन्य अंगों पर औषधियों के दुषप्रभाव से बचा जा सकता है।
इनहेलर के प्रयोग के पश्चात् रोगी को अपने मुंह को पानी से अच्छी तरह से साफ करना चाहियें। जिससे मुंह मे रह गयी दवा रोगी को नुकसान ना पहुचा सके। नेबुलाइजर मशीन का प्रयोग केवल छोटे बच्चों अथवा गम्भीर रोगियों मे किया जाना चाहिये क्योकि नेबुलाइजर के नियमित प्रयोग से उसकी ट्यूब को साफ ना किया जाये तो इस स्थिति में संक्रमण का खतरा बना रहता है। विषेशज्ञो द्वारा प्रारम्भ की गयी दवाईयो को अपने आप कम ना करे तथा निर्देशो का पूर्ण रुप से पालन करे।
बोर्निकाल थर्मोप्लास्टी
 इस युग मे यह एक उन्नत विधा है जिसमे अस्थमा के गम्भीर रोगियों में जिनमें श्वास की नली की सिकाई की जाती है। सिकाइ से अस्थमा रोगियों की श्वांस नली की मोटी मासपेसियो की परत पतली हो जाती है। जिससे गम्भीर दमा से पीड़ित मरीजों को फायदा पहुँचता है।  इम्यूनोथैरेपी भी एलर्जी के मरीजों का इलाज करने की अन्य विधा है । इम्यूनोथैरेपी मे अस्थमा करने वाले एलर्जन को बढ़ती हुई मात्रा में देकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है। एलर्जी के मरीजों में इम्यूनोथेरिपी द्वारा दवाओं की मात्रा को घटाने मे मदद मिलती है।
कोरोना और अस्थमा 
इस बात के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं कि अस्थमा के मरीजों को कोविड-19 से संक्रमित होने की अधिक संभवना है। किसी भी वायरल संक्रमण से अस्थमा की स्थिति बिगड सकती है इसलिए अस्थमा के मरीज और विशेष रूप से अधिक गंभीर बीमारी वाले लोग कोविड-19 से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही कारोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए काफी संख्या में मरीज अस्पताल के दौरे से बच रहें हैं ऐसे में कुछ जरूरी उपाय ये हैं।
1. मरीजों को घर पर रह कर ही स्वयं की समुचित देखभाल करना।
2. संदिग्ध मरीजों से  सामाजिक दूरी का ध्यान रखना।
3. अस्थमा के अटैक के लिये जिम्मेदार कारक से सावधान रहना।
4. शुद्ध एवं पौष्टिक आहार का नियमित सेवन करना।
5. इन्हेलर की खुराक अपने डाक्टर द्वारा बताये गये के अनुसार ही लें अपने आप कम न करें।
कोरोना और लाॅकडाउन
कोविड- 19 संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में पिछले डेढ माह से कफर्यू/लाॅकडाउन जारी  है जिसके चलते ट्रैफिक व फैट्री बंद होन के  कारण हवा के प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आयी है और एयर क्वालिटी इंडेक्स भी इन दिनों संतोषजनक स्तर पर है। गेंहू व धान की कटाई के बाद अस्थमा के मरीजों की संख्या में 50 फीसदी तक इजाफा जो जाता था, परन्तु इस बार पिछले वर्ष की तुलना के मुकाबले इस वर्ष अस्थमा मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक गिरावट आई है।
पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, के0जी0एम0यू0, यू0पी0, लखनऊ द्वारा सप्ताह के हर सोमवार को अस्थमा एंव एलर्जी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। परन्तु कोविड- 19 को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है। विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर इस विभाग में समाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए सेमीनार का आयोजन किया गया, जिसमें – डाॅ अमित, डाॅ अभिषेक, डाॅ सचिन, डाॅ कैफी, डाॅ विकास, डाॅ सुलक्षना, डाॅ रंजय, डाॅ गौरव, डाॅ ध्यानेन्द्र एवं अन्य स्टाफ  की उपस्थिति में संम्पन्न किया गया।

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