गैर प्रांतों में फंसे मजदूरों को पेट की आग ने कोरोना के संक्रमण का भय  और सील सीमाओं के बंधन तोड़ने को मजबूर कर दिया। मंगलवार को भी सुबह हरियाणा से साइकिलों से जा रहे मजदूरों के जत्थे ने जनपद की सीमा में प्रवेश किया।

राज्य सरकारें भले ही लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को उनके घर पंहुचाने का दावा कर रही हों लेकिन पैदल, साइकिलों से घर के लिए निकले लोग सरकार के प्रयासों को नाकाफी बता रहे हैं। मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा दिखा सिकंदरा औरैया सीमा पर, जहां हरियाणा से बनारस जा रहे मजदूरों का साइकिल सवार जत्था बेखौफ होकर गुजर रहा था। इसमें बनारस के दो दर्जन से अधिक मजदूर सुरेंद्र, अमित, नीरज, रामखिलावन ने बताया कि हरियाणा में मजदूरी कर पेट पालते थे। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में काम ठप हुए तो रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया, एक महीने में जो कुछ जमा पूंजी थी वह भी खत्म हो गई।

इस बीच हरियाणा सरकार द्वारा फंसे लोगों को घर भेजने की सूचना पाकर राहत मिली लेकिन कोई पहल न देखकर पेट की आग ने साइकिल से ही हरियाणा से बनारस घर जाने को मजबूर कर दिया। उन्होने बताया कि आगरा में रास्ता भूल जाने पर 200 किमी साइकिल अतिरिक्त चलानी पड़ी । मजदूरों ने बताया कि रास्ता भटक जाने पर फोन से परिजनों, जानकार मित्रों से रास्ता पूछ लेते हैं।

मजबूरी देख जिले की सीमाओं में नहीं रोकती पुलिस
प्रवासी मजदूरों ने बताया कि सीमाओं पर तैनात पुलिस उन लोगों को मजबूर ,परेशान देखकर छेड़ती नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर वे  लोग हरियाणा से निकलने की जिद नहीं करते तो भूखे रहकर मौत हो जाती वहीं परिजनों ने भी किसी भी तरह घर आने की सलाह दी।  मजदूरों ने बताया कि गांव पंहुचकर रूखी सूखी रोटी तो मिलेगी।  भूखे फिर भी नहीं मरना पड़ेगा । यहां तक आ गए हैं तो फिर किसी न किसी तरह घर पहुंच ही जाएंगें।

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