न्यूजनेटवर्क 24 प्रतिनिधि:kalyan
राजनीति में मित्र या शत्रु का कोई स्थाई भाव नहीं होता लेकिन कुछ जख्म ऐसे हैं जिनका मरहम समय के पास भी नहीं होता। कुछ ऐसा ही कांग्रेसी नेता जगदम्बिका पाल के साथ हो रहा है। दो मार्च की भाजपा की रैली में पाल साहब को बड़ी उम्मीद थी कि वह भाजपा में शामिल हो जाएंगे औैर मोदी के साथ मंच साझा करेंगे पर ऐसा हो नहीं पाया। वह भूल गए कि इसी मंच पर कल्याण सिंह भी हैं जो उन्हें उस दिन के लिए कभी माफ नहीं कर पाएंगे जब मुख्यमंत्री बनने के लिए जगदम्बिका पाल ने सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी थीं। उत्तर प्रदेश के इतिहास में वह ऐसी अनूठी घटना थी जब दो-दो मुख्यमंत्री पंचम तल पर थे और कोई भी नहीं हट रहा था। जगदम्बिका पाल का साथ नरेश अग्रवाल ने भी बखूबी दिया था। इस घटना के विरोध में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी अनशन पर बैठना पड़ा था। राजनाथ सिंह तो पाल को भाजपा में शामिल कराना चाहते थे लेकिन कल्याण सिंह बीच में आ गए। कल्याण का कद भाजपा में फिर से बढ़ गया है। मोदी की पसंद भी है कल्याण इसलिए राजनाथ कल्याण को ओवरटेक कर सकने की स्थिति में है भी नहीं। कल्याण भाजपा में ऐसे नेता हैं जिन्हें मोदी के साथ-साथ संघ व लालकृष्ण आडवाणी का भी समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस से बगावत कर पाल कुछ और कांग्रेसी सांसदों को भी भाजपा में लाने वाले थे पर कल्याण सिंह के आगे किसी का न चली। पाल उन्नाव से कांग्रसी सांसद अन्नू टंडन को भी भाजपा के पाले में लाने वाले थे पर कल्याण ने नहीं होने दिया कल्याण।

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