यूपी सरकार ने  दूसरे राज्यो के फंसे लोगो को वापस लाने की मुहिम तेज कर दी है। दिल्ली, गुजरात की सरकार से यूपी ने संपर्क कर सहयोग मांगा है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों मुम्बई, पूणे व नागपुर आदि से यूपी लाने की है। यूपी सरकार चाहती है कि महाराष्ट्र की बसें वहां फंसे लोगों को यूपी की सीमा तक पहुचाने का काम करें। साथ ही इनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाए। अभी महाराष्ट्र सरकार से यूपी के कामगारों व अन्य लोगो का विवरण देने को कहा गया है। प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक विवरण आने के बाद तय होगा कि किस तरह चरणबद्ध तरीके से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ उनकी सुरक्षित वापसी हो।

वैसे दूरी ज्यादा होने के कारण इन्हें विशेष ट्रेन से लाने का विकल्प भी है। पर इसमें निर्णय केन्द्र सरकार को करना है। सूत्र बताते हैं कि 5 से 10 लाख लोगों के  शेल्टर होम तैयार करना बड़ा काम है। एक साथ लाखों के आने दिक्कत बढ़ेगी। सरकार दूसरे राज्यों के लोगों को अपनी बसों से वापस उनके राज्य भेजने में जुटी है। यूपी की बसे मध्य प्रदेश भी गुरुवार को रवाना हुई।

शुरू हो चुकी है तैयारी : 

यूपी सरकार ने संबंधित राज्य सरकारों से प्रवासी श्रमिकों के नाम, पते, टेलीफोन नम्बर तथा स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति सहित सम्पूर्ण विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।  ताकि उनकी सुरक्षित वापसी की कार्य योजना को आगे बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री ने लोकभवन में टीम 11 के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक भी की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रदेश वापसी से पूर्व, प्रवासी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाए।

दिल्ली से छात्रों को वापस लाया जाए
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि नोएडा के साथ दिल्ली से भी उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं को वापस लाने के लिए वहां की सरकार से सम्पर्क किया जाए। उन्होंने कहा कि नोएडा, गाजियाबाद तथा अलीगढ़ से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वापस जाने वाले छात्रों की सूची तैयार करायी जाए।

यूपी का बार्डर सील रखा जाए
मुख्यमंत्री  ने कहा  कि प्रदेश के बार्डर को पूरी तरह सील किया जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बरती जाए।  नेपाल राष्ट्र सहित अन्य राज्यों से बगैर अनुमति कोई प्रदेश में आने न पाए। उन्होंने कहा कि 10 लाख लोगों के लिए तत्काल क्वारंटीन सेन्टर व शेल्टर होम और कम्युनिटी किचन तैयार किये जाएं, जहां आने वाले प्रवासी मजदूरों को तात्कालिक रूप से रखा जा सके। क्वारंटीन सेन्टर व शेल्टर होम स्थापना के लिए बड़े कालेजों का उपयोग किया जाए।

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