साल 1996 में हुए वर्ल्ड कप की मेजबानी संयुक्त रूप से भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने की थी, जिसमें अब टैक्स का जिन्न सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि 1996 में आयोजित क्रिकेट विश्व कप के लिए गठित पाक-इंडो-लंका संयुक्त प्रबंधन समिति (पिलकॉम) को इस टूर्नामेंट से संबद्ध अप्रवासी खेल संगठनों को भुगतान करते समय स्रोत पर ही कर काट लेना चाहिए था।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के नवंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ पिलकॉम की अपील पर अपने निर्णय में कहा कि टूर्नामेंट के लिए अप्रवासी खेल संगठनों को किया गया भुगतान उनकी आमदनी को परिलक्षित करता है जो भारत में अर्जित की गई थी। परिणामस्वरूप पिलकॉम को आयकर कानून की धारा 194ई के अनुसार, स्रोत पर ही कर काट लेना चाहिए था। यह धारा अप्रवासी खिलाड़ियों या खेल संगठनों को किए गए भुगतान से संबंधित है।

पिलकॉम को स्रोत पर काटना था टैक्स: सुप्रीम कोर्ट

फैसले में कहा गया कि तीनों मेजबान देशों को टूर्नामेंट के प्रारंभिक चरण के मैचों और अपने-अपने देशों में खेल के प्रचार के सिलसिले में विभिन्न देशों के क्रिकेट बोर्ड या एसोसिएशनों को अलग अलग राशि का भुगतान करना था। इसके लिए पिलकॉम ने लंदन मे दो बैंक खाते खोले थे जिनका संचालन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी को संयुक्त रूप से करना था।

आयकर विभाग को यह जानकारी मिली कि पिलकॉम ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आइसीसी और इसके सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड को लंदन के बैक खातों से भुगतान किया था। आयकर विभाग ने कोलकाता स्थित पिलकॉम के कार्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि आयकर कानून के प्रावधान के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

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