manish-tiwariलोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक और बड़ा चुनावी दांव खेला है। केंद्रीय कैबिनेट ने रविवार को जाट समुदाय को आरक्षण देने का ऐलान कर दिया। हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के एंजेडे में शामिल भ्रष्टाचार विरोधी विधेयकों को अध्यादेश के जरिए पास करने का फैसला कैबिनेट नहीं ले सकी। बैठक में कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बाद बनने वाले सीमांध्र को पांच साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने का भी फैसला किया। रविवार देर शाम केंद्रीय कैबिनेट ने जाट समुदाय को ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का फैसला ले लिया। इस फैसले के साथ ही जाटों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का रास्ता साफ हो गया। कैबिनेट के फैसले में बिहारए राजस्थानए गुजरातए उत्तर प्रदेशए दिल्लीए हिमाचल प्रदेशए मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में जाट समुदाय के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की बात कही गई है। काफी अरसे से जाट समुदाय आरक्षण की मांग कर रहा था और इसे लेकर कई बार धरना.प्रदर्शन भी किया गया।
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह ने शनिवार को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी और कहा था कि अगर जाट आरक्षण को मंजूरी नहीं दी गई तो उनके लिए मंत्रिमंडल में रह पाना मुश्किल होगा। यही नहीं जाट आरक्षण समिति ने भी सरकार को धमकी दी थी कि अगर जाटों को आरक्षण नहीं मिलाए तो वो कांग्रेस को वोट नहीं देंगे। कैबिनेट के इस फैसले पर अजित सिंह समेत जाट समुदाय के नेताओं ने खुशी जताई है।
केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने कहा कि जाट रिजर्वेशन पर मैं सरकार का आभार प्रकट करता हूं। जिन्होंने समाज में एकता बनाए रखी और इस आरक्षण के लिए सोनिया और मनमोहन का भी धन्यवाद है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरक्षण को मंजूरी मिलने के बाद कहा कि बहुत दिनो से हमारी मांग थीए सरकार ने हमें हमारा हक दिया है।
सीमांध्र को पांच साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा
रविवार की कैबिनेट ने दिल्ली में 123 संपत्तियों का मालिकाना हक वक्फ बोर्ड को देने का भी फैसला किया। अब तक इन संपत्तियों को मालिकाना हक के लिए डीडीए और वक्फ बोर्ड के बीच तनातनी बनी हुई थी। साथ ही कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश से अलग होकर बनने वाले सीमांध्र को पांच साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने का भी फैसला किया है। कयास लगाए जा रहे थे कि कैबिनेट की बैठक में भ्रष्टाचार विरोधी अध्यादेशों को भी मंजूरी मिल सकती हैए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस सिलसिले में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदेए एण्केण् एंटोनी और अहमद पटेल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें अध्यादेश के बारे में जानकारी भी दी थी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार विरोधी विधेयकों को पर अध्यादेश लाने पर एतराज जताया था।

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