सुप्रीम कोर्ट के एक कर्मचारी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की सोमवार को पुष्टि हुई। सूत्रों ने बताया कि शीर्ष कोर्ट के न्यायिक अनुभाग में कार्यरत यह कर्मचारी 16 अप्रैल को ड्यूटी पर आया था। वह इस दौरान न्यायालय के दो रजिस्ट्रार के संपर्क में भी आया था जिन्हें एहतियातन क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी गई है।

कोविड-19 की जांच में कर्मचारी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई

सूत्रों ने बताया कि 16 अप्रैल को अदालत आने के बाद दो दिन तक उसे बुखार आया जिसके बाद उसकी कोविड-19 की जांच कराई गई और सोमवार को आई रिपोर्ट में कर्मचारी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। कर्मचारी का सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। मानक प्रोटोकॉल के तहत संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी का कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पहला मामला

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी का कोरोना वायरस से संक्रमित होने का यह पहला मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के चलते 23 मार्च से अदालत की कार्यवाही को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये केवल अति आवश्यक मामलों की सुनवाई तक सीमित किया है।

जजों को धमकाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को फटकारते हुए कहा कि जजों को धमकाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाएगा। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि नागरिकों को फैसले की आलोचना करने का हक है। लेकिन किसी को इस बात का अधिकार नहीं है कि जजों के इरादों, गुणों और प्रमाणिकता पर सवाल खड़े करे। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को दो वकीलों समेत तीन लोगों को अदालत की अवमानना के मामले में दोषी करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के दो सिटिंग जजों के खिलाफ इन वकीलों के आरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि उनकी इन हरकतों से वकीलों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होगी। जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा कि न्यायपालिका समेत किसी भी संस्था की प्रमाणिक और सकारात्मक आलोचना और न्यायपालिका के फैसलों की आलोचना का हमेशा स्वागत है। यह कभी भी अदालत की अवमानना नहीं हो सकता है। लेकिन अगर आरोप आलोचना के दायरे से बाहर चले जाते हैं और उन लिखित शब्दों से कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं तो वह निश्चित रूप से अवमानना का मामला है।

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