shilpa-yoga1_fआजकल भागती दौड़ती दुनिया में लोगों के पास खुद के लिए समय नहीं है। सेहत को फिट करने के लिए योग का सहारा लेना अब जरूरी हो गया है। जीवन में जरूरत बनते योग और उससे जुड़ी सम्भावनाओं पर नजर डाल रही हैं पूजा कौशिक
स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को अनुशासित जीवन जीने और अपने लक्ष्य पर केंद्रित करने, परीक्षा के तनावों से मुक्ति दिलाने के लिए योग प्रशिक्षक रखे जा रहे हैं। बॉलीवुड और हॉलीवुड की बात करें तो वहां मानसिक और शारीरिक सौन्दर्य में निखार लाने के लिए अभिनेता और अभिनेत्रियां योग क्लास की शरण में जाती हैं। वे काम के दबावों से मुक्ति और शांति पाने के लिए भी योग कक्षाओं में जाते हैं।
ब्रह्मïम प्राप्ति का मार्ग बताने वाला योग अब बाजार के लिए ब्रांड बन गया है। ऐसा ब्रांड, जिसका सिक्का बाजार में खूब चलता है और चलाने वाले की अच्छी-खासी कमाई भी होती है। उसके लिए यह जीविकोत्पार्जन का अच्छा-खासा साधन बन गया है। यही कारण है कि युवाओं में यह करिअर के नए अध्याय के रूप में जुड़ गया है। योग प्रशिक्षक या इंस्ट्रक्टर के रूप में आज का युवा चाहे कॉरपोरेट दफ्तर हो या छोटे शहर का गली-मोहल्ला हर जगह छाया हुआ है। किसी को शांति का रास्ता बताता हुआ तो किसी को रोग से छुटकारा पाने का उपाए। किसी बाबू या मैनेजर को जीवन में तनावों से मुक्ति पाने का रास्ता बताता है तो छात्रों को ध्यानभंग से बचने का उपाय। वह गांव से लेकर महानगर के दमघोंटू माहौल में हर किसी को सुख, शांति और समृद्धि का सस्ता और सहज उपाय बता रहा है।
साधना की विभिन्न विधियों को जानने वाले शख्स को योग इंस्ट्रक्टर, योग प्रशिक्षक या योग शिक्षक के नाम से जाना जाता है। योग शिक्षक या प्रशिक्षक बनने वाले को कोर्स में इन सबकी जानकारी दी जाती है। इसका ज्ञान कराया जाता है। बाजारीकरण और उदारीकरण के दौर में पिछले बीस सालों में भारत में करिअर के क्षेत्र में योग इंस्ट्रक्टर की मांग खूब बढ़ी है। निजी स्कूल हों या कॉलेज या विश्विद्यालय, सरकारी हों या निजी दफ्तर, हॉलीवुड हो या बॉलीवुड योग इंस्ट्रक्टर इनमें अपना महत्वपूर्ण रोल अदा करने लगा है। अस्पताल, कर्मचारी प्रशिक्षण केंद्र और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र जैसी सभी जगहों पर इसकी जरूरत पड़ रही है। अस्पताल में आर्थराइटिस और अस्थमा वाले मरीज को भी योग प्रशिक्षक की जरूरत पड़ती है। उन्हें योग साधना कराकर स्वास्थ्य लाभ कराया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को अनुशासित जीवन जीने और अपने लक्ष्य पर केंद्रित करने, परीक्षा के तनावों से मुक्ति दिलाने के लिए योग प्रशिक्षक रखे जा रहे हैं। बॉलीवुड और हॉलीवुड की बात करें तो वहां मानसिक और शारीरिक सौन्दर्य में निखार लाने के लिए अभिनेता और अभिनेत्रियां योग क्लास की शरण में जाती हैं। वे काम के दबावों से मुक्ति और शांति पाने के लिए भी योग कक्षाओं में जाते हैं। योग की इन क्रियाओं को और साधना को जानने के लिए आज देश भर में जगह-जगह खुले संस्थानों में कई कोर्स चलाए जा रहे हैं। कहीं सर्टिफिकेट व डिप्लोमा का कोर्स है तो कहीं डिग्री का। कई विश्वविद्यालय योग में रिसर्च यानी पीएचडी भी करा रहे हैं। कुशल और प्रोफेशनल योग शिक्षक बनने के लिए यह कोर्स जरूरी है। पहले यह साधना से ही सीखी जाती थी लेकिन बदलते जमाने में इसे पाठ्यक्रम में ढाल दिया गया है जहां अभ्यास और उससे जुड़ी थियरी की ट्रेनिंग दी जाती है। योग प्रशिक्षक के लिए किसी संस्थान में नियमित कर्मचारी के रूप में काम करने के अलावा, एक बड़ा रास्ता कोचिंग सेंटर खोलने का भी है। इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाया जाता है। स्कूलों में योग शिक्षक को टीजीटी यानी ट्रेंड ग्रेजुएट टीजर का वेतनमान मिलता है। कॉलेजों में इन्हें योगाचार्य कहा जाता है। उनके लिए लेक्चरर, रीडर व प्रोफेसर बनने का विकल्प खुला होता है।
वेतन की बात करें तो स्कूलों में टीजीटी स्केल यानी 25 से 30 हजार रुपए का वेतन शुरुआती तौर पर है। इसी तरह कॉलेजों में योगाचार्य के वेतनमान की शुरुआत 40 हजार रुपए से शुरू है। इसके अलावा, स्वरोजगार के तौर पर आय प्रतिमाह 15 हजार रुपए से लेकर लाखों रुपए तक हो सकता है। अगर आप यह कोर्स करना चाहते हैं तो 12वीं के बाद सर्टिफिकेट, डिप्लोमा से लेकर डिग्री व पीएचडी तक सभी तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। किसी भी छात्र को जरूरत के हिसाब से ही कोर्स में दाखिला लेना जरूरी है।
अगर आप कोर्स करने की सोच रहे हैं तो बिहार स्कूल ऑफ योगा, गंगा दर्शन, मुंगेर कोर्स, संन्यास ट्रेनिंग, साधना शिविर, क्रिया योग साधना, योगा टीचर ट्रेनिंग हिंदी व अंग्रेजी में है। अन्य प्रमुख संस्थान कैवल्यधाम, लोनावाला, पुणो डिवाइन लाइफ सोसायटी, ऋषिकेश जैन वि भारती, लाडन, राजस्थान मोरारजी देसाई नेशनल स्कूल ऑफ योगा, नई दिल्ली गुरुकुल कांगड़ी विवि, हरिद्वार देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार सरीखे कई संस्थान हैं।

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