कैंसर से पीड़िता अपनी बहन की मदद करने के लिए 2,409 किलोमीटर की यात्रा करने वाली 48 वर्षीय देवेश्वरी सीएच को कोविड 19 का खतरा भी नहीं रोक सका। वह अपनी बहन को बोनमैरो दान करने के लिए मणिपुर के इम्फाल से लगातार चार दिन गाड़ी चलाकर इंफाल पहुंची। महिला 22 अप्रैल को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती अपनी बहन निंगोली के पास गुरुग्राम पहुंची। निंगोली एक प्रकार के ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। उनका कैंसर गंभीर रिस्क पर है और बोन मैरो न मिलने पर उनकी मौत संभव थी।

रक्त विकार संस्थान और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, एफएमआरआई के डॉ राहुल भार्गव  ने कहा कि प्रत्यारोपण से पहले  निंगोली की पहली दो कीमोथेरेपी विफल रही, लेकिन उनकी तीसरी कीमोथेरेपी अच्छी थी।। उनका इलाज लॉकडाउन पहले से ही चल रहा था जबकि हमने उसके परिवार को तब सूचित किया जब उन्हें ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। देवेश्वरी को 7 अप्रैल को उनकी बहन की स्थिति में सुधार के बारे में बताया गया। परिवार ने एक सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया, कि शायद लॉकडाउन को हटा दिया जाएगा।

देवेश्वरी की बेटी, विलीना एल, ने कहा, “हमने 15 अप्रैल के लिए फ्लाइट टिकट बुक की थी। हालांकि, 13 अप्रैल तक, लॉकडाउन के विस्तार के बारे में खबर थी, इसलिए हमने राज्य सरकार से संपर्क किया। हमने उनसे पूछा कि क्या मेरी माँ कार्गो विमानों पर सवारी कर सकती है, लेकिन हमें इसकी अनुमति नहीं मिली। जब हमने ट्वीट किया और जनता और सरकारी एजेंसियों से बहुत समर्थन मिला। लॉकडाउन के तहत, केवल दो लोगों को एक कार में यात्रा करने की अनुमति है, लेकिन दो ड्राइवरों समेत 5 लोगों को लिए अनुमति मिली। क्योंकि उन्हें लंबी दूरी तय करनी थी। डॉक्टरों ने निंगोले को कीमोथेरेपी एक बार और दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह अपने परिवार के आने तक स्वस्थ रहे।

विलीना ने बताया कि लॉकडाउन के कारण, कोई भी होटल या रेस्तरां रास्ते में नहीं खुलता है। सभी पड़ावों की योजना बनाते हुए हमें यात्रा को सावधानीपूर्वक पूरा करना था। जिला अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के साथ संपर्क किया, जिन्होंने रास्ते में होटल और गेस्ट हाउस में हमारे ठहरने की व्यवस्था की। हम इतनी लंबी दूरी की यात्रा करने से घबराए और चिंतित भी थे, खासकर उत्तर पूर्व के पहाड़ी इलाकों में, लेकिन अधिकारियों ने हमें रास्ते में हर कदम पर मदद की।

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