विदेश से भारतीय नागरिकों को लाने पर लगी रोक के बीच मानवीय आधार पर फैसला करते हुए एक पांच साल की कैंसर पीड़ित बच्ची को इलाज के लिए कुवैत से भारत लाया गया। सिर में ट्यूमर की वजह से उसकी हालत गंभीर थी और मेडिकल रिपोर्ट में तुरंत सर्जरी की जरूरत बताई गई थी। बच्ची शनिवार को दिल्ली लाई गई और उसे इलाज के लिए एम्स भेज दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि कुवैत में बच्ची के इलाज का उचित इंतजाम नहीं हो पा रहा था। कुवैत स्थित भारतीय मिशन को इसकी जानकारी मिली तो इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय से साझा की गई। आनन फानन में अंतरमंत्रालयी विचार विमर्श के आधार पर बच्ची को यहां लाने की मंजूरी दे दी गई।

सूत्रों ने बताया कि कुवैत में सहायता के लिए गई मेडिकल रैपिड रेस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को देश वापस आना था। जब लड़की साधिका रीथीश कुमार के बारे में भारतीय मिशन को जानकारी मिली तो सरकार में विभिन्न पक्षो से संपर्क करके ये फैसला किया गया कि लड़की को रैपिड रेस्पॉन्स मेडिकल टीम के साथ ही वापस लाया जाए, जिससे वह चिकित्सीय निगरानी में सकुशल यहां पहुंच सके। मंजूरी के बाद आरआरटी टीम ने उसकी चिकित्सीय हालत का परीक्षण किया और निगरानी में विशेष फ्लाइट से वापस लाया गया।

कुवैत में रहता था परिवार: सूत्रों ने कहा कि लड़की के माता पिता कुवैत में ही काम करते हैं। केरल के पलक्कड़ का रहने वाला ये परिवार बच्ची को लेकर बहुत परेशान था। भारत आने पर लगी रोक की वजह से कुवैत में ही इलाज कराने की कोशिश हो रही थी।

रिपोर्ट की पड़ताल के बाद फैसला: नन्ही बच्ची के सिर में ट्यूमर था। डॉक्टर की रिपोर्ट में बच्ची की हालत गंभीर बताई गई थी। वहां डॉक्टरों ने उपयुक्त इलाज को लेकर असमर्थता जताई थी। पूरी रिपोर्ट देखने के बाद भारतीय मिशन की पहल पर बाद उसे वापस लाने की कोशिश शुरू हुई।

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