लॉकडाउन के बीच शनिवार को एक बाराती वाली अनोखी बारात निकली। घराती भी केवल दुल्हन की मां और भाई रहे जिन्होंने पूरी जिम्मेदारी संभाली। इस अनूठी शादी की रस्में मध्यस्थ रियांव गांव निवासी डॉ. रामकुबेर यादव के घर पर पूरी हुईं। शांतिकुंज हरिद्वार के आचार्य आलोक कुमार सिंह ने विधि-विधान से शादी सम्पन्न कराई।

सहजनवा क्षेत्र के भीटी रावत गांव निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार रावत के बेटे सर्वेश की शादी काफी पहले देवरिया जिले के एकौना क्षेत्र स्थित डढ़िया गांव निवासी स्व. जगनारायण यादव की बेटी पिंकी यादव से तय थी। विजय के करीबी मित्र रियांव गांव निवासी डॉ. रामकुबेर यादव ने यह शादी तय कराई थी। शादी की तिथि 25 अप्रैल को मुकर्रर थी। लॉकडाउन में दोनों परिवारों को लगा कि शादी की तिथि बदलनी पड़ेगी। इस बीच डॉ. रामकुबेर यादव ने पहल की तो धुन के पक्के विजय ने तय किया कि शादी तय तिथि पर ही होगी। डॉ. रामकुबेर ने कहा कि शादी की रस्म वह अपने गगहा क्षेत्र के रियांव गांव स्थित घर से सम्पन्न कराएंगे। उनका यह व्रत शनिवार को पूरा हुआ। अधिवक्ता विजय बतौर बाराती अपने बेटे सर्वेश के साथ शनिवार की सुबह 5:30 बजे रियांव गांव पहुंच गए। यहां पिंकी अपनी मां इसरावती और भाई विनय के साथ पहले ही पहुंच गई थी। डॉ. रामकुबेर ने शांतिकुंज हरिद्वार के आचार्य अनिल कुमार सिंह को भी भोर में ही बुलवा लिया था। यज्ञ कुंड तैयार था। थाल में पूजा की सामग्री सजा दी गई थी। सुबह 6 बजे से विधि-विधान से शादी की रस्में शुरू हुईं। तकरीबन 4 घंटे में शादी की रस्म पूरी कराई गई। सर्वेश और पिंकी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जनम-जनम के बंधन में बंध गए। इसके बाद डॉ. रामकुबेर ने सभी को भोजन कराया और फिर दुल्हन की ससुराल के लिए विदाई हुई।

एक रुपये भी दहेज नहीं लिया
लॉकडाउन के बीच शनिवार को सम्पन्न हुई इस अनोखी शादी में आश्चर्यजनक यह भी रहा कि दूल्हा पक्ष ने एक रुपये भी दुल्हन पक्ष से दहेज के रूप में नहीं लिया। लड़की पक्ष के लोगों ने कुछ नेग भी देना चाहा तो दूसरे पक्ष ने उसे यह कहकर लेने से मना कर दिया कि इस शादी में कुछ भी न लेने का उन्होंने मन बना लिया है।

डा. रामकुबेर ने कराया भोजन और जलपान
दूल्हे और एक बाराती तथा तथा दुल्हन और दो घरातियों और आचार्य के लिए भोजन का प्रबंध डा. रामकुबेर यादव ने अपने आवास पर ही कराया था।

विदा होकर ससुराल गई दुल्हन
विधि विधान से शादी की रस्म पूरी होने के बाद पिता-पुत्र ने भोजन किया और फिर दुल्हन को गाड़ी में बैठाकर साथ ले दोनों अपने घर को लौट गए।

तहसील प्रशासन से ली थी अनुमति
अधिवक्ता विजय रावत और डा. रामकुबेर यादव ने इस शादी समारोह को सम्पन्न कराने के लिए बांसगांव तहसील प्रशासन से अनुमति ली थी। दो गाड़ियों का पास भी जारी कराया था।

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