संस्कार पत्रिका की एसोसिएट एडीटर सोनीकिशोर सिंह बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका नंदन के नवीनतम अंक में हनी सिंह की महिमा बखान से दुखी हैं। उनकी फेसबुक वाल से साभार: sonyबाल पत्रिकाओं में नंदन एक महत्वपूर्ण नाम है। मैं भी बचपन से नंदन पढ़ती आई हूँ। लेकिन आज जब अचानक मार्च 2014 के नंदन का अंक देखा तो विचलित हो गई। बच्चों के मनोरंजन और लगातार ज्ञानवर्धन करने वाली इस पत्रिका के स्वर्ण जयंती वर्ष में इस बार यो यो हनी सिंह को छापकर पता नहीं संपादक मंडल बच्चों को क्या सिखाना चाहते हैं। एक प्रतिष्ठित, लोकप्रिय बाल पत्रिका का ऐसा हश्र देखकर संपादक शशि शेखर और वरिष्ठ फीचर संपादक जयंती रंगनाथन की मानसिकता पर क्षोभ हो रहा है। जिस गायक पर अश्लील गाना गाने का आरोप है उसे अपनी पत्रिका में महिमामंडित करने का कोई औचित्य समझ से परे है। पत्रकारिता और पत्रकारों का संक्रमणकाल है यह तो रोज ही साबित हो रहा है लेकिन इस संक्रमण से बाल पत्रिकाओं को संक्रमित करने वाले पत्रकारों पर लानत है। उनको सोचना चाहिए कि बालमन को अगर हनी सिंह जैसे स्टार दिखायेंगे तो भविष्य का भारत कैसा होगा ?

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