वैद्याचार्य डॉ. स्वदेश अग्रवाल
वैद्याचार्य डॉ. स्वदेश अग्रवाल

संक्रामक रोग स्वाइनफ्लू जिसे आयुर्वेद में वात ज्वर कहते हैं। किसी भी आयु के व्यक्ति में बढ़ा हुआ तापमान, अत्यधिक थकान ,सिरदर्द,ठण्ड लगना,सांस लेने में तकलीफ,गले में खराश,भूख कम लगना,पेट खराब होना जैसे कि उल्टी या दस्त होना,मांसपंशियों में बेहद दर्द होना ये सभी लक्षण किसी स्वस्थ व्यक्ति में मिल रहे हों या ज्वर के साथ इनमें से तीन लक्षण मिल रहे हो तो वह स्वाइनफ्लू का रोगी हो सकता है। स्वाइन फ्लू का वायरस बेहद संक्रामक होता है जो एक इंसान से दूसरे तक उसमें एंटीबोडी न होने पर बहुत तेजी से फैलता है। जब कोई खांसता या छींकता है,तो छोटी बूंदें तेजी से हवा में फैल जाती हैं। बच्चे और युवा,बड़े वयस्कों की अपेक्षा स्वाइनफ्लू से जल्दी संक्रमित होते हैं।
स्वाइनफ्लू में वही दवायें ली जा सकती हैं जो दवायें न्यूमोनिया होने पर ली जाती हैं। स्वाइनफ्लू रो
गी को अत्यधिक ठण्ड लगती है। इस रोग में तुलसीपत्र,अदरक का रस,काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना कर दिन में २-३ बार चटने से रोगी ठीक होजाता है। अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए हुए नम्बर या फिर मेल के द्वारा सम्पर्क किया जा सकता है।

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