डा० अनिरूद्घ वर्मा (सदस्य, केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद)

होम्योपैथी दवा हर रोग में कारगर असर दिखाती है। उसके प्रयोग से दुष्परिणाम कम ही देखने को मिलते हैं। रोग के उपचार में समय भले ही लग जाए लेकिन वह ठीक हो कर ही रहता है। देश की 80 त्न आवादी गांवों में निवास करती है। ग्रामीणों की दिनचर्या शहरी लोगों से बिल्कुल अलग होती है। शहरों में जहां मधुमेह,मोटापा, ह्रदय रोग,उच्च रक्तचाप, तनाव, अवसाद आदि रोग ज्यादा होते हैं। वहीं पर ग्रामीणें की स्वास्थ्य समस्याएं बिल्कुल अलग हैं। गांवो में पेटरोग,कब्ज, गैस, अपच, दस्त, पेचिस, कमजोरी, थकान, खून की कमी, पेट में कीड़े, हैजा, गैस्ट्रोऐट्राइटीस, वाइरल फीवर,मियादी बुखार, चिकनपॉक्स,खसरा,प्राइमरी काम्पेल्स,त्वचा सम्बंधी रोग जैसे खुजली,अकौता, नाखूनों के रोग,सांस सम्बंधी रोग जैसे दमा, क्षय रोग,दांत के रोग, जैसे पाइरिया, मसूड़ों में सूजन, दांतों का क्षय, महिलाओं में ल्यूकोरिया आदि अनेक प्रकार के रोग ग्रामीणों पर ज्यादा आक्रमण करते हैं।dr anurudh verma
भारत के गांवों की आर्थिक स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। ज्यादातर लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। रहन-सहन की व्यवस्था भी निम्न स्तर की है। लोग सीलन भरे गन्दे मकानों एवं झोपडिय़ों मे रहने के लिए विवश हैं। उन्हें पीने के लिए साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है। आर्थिक कमजोरी के कारण संतुलित भोजन भी उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे में उनके लिए स्वस्थ्य रहना किसी सपने से कम नहीं है। लगातार बीमारी उन्हें आर्थिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर बनाती है। परिणाम स्वरूप वह बीमारी ग्रस्त जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हैं। आर्थिक कमजोरी, गरीबी एवं अशिक्षा आदि के कारण गांव के लोग मंहगी चिकित्सा पद्घति से इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। यहां तक कि उन्हें अपने रोगों के उपचार के लिए जमीन, जायदाद बेचनी पड़ती है। खेती, मकान गिरवी रखने पड़ते हैं। आंकड़े बताते हैं कि मंहगा इलाज कराने के कारण देश मे लगभग 39 लाख लोग प्रति बर्ष गरीबी रेखा नीचे चले जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्वीकार किया है कि भारत में लगभग 70त्न से ज्यादा लोग अपनी क्षमता से अधिक उपचार एवं दवाओं पर खर्च करने को विवश हैं। जिसकी वजह से वह लगातार गरीब होकर आर्थिक संकटों से गुजर रहे हैं। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी अभी स्वास्थ्य सुविधाएं गांव के लिए दूर के कौड़ी है। स्वास्थ्य सुविधओं के अभाव में ज्यादातर लोग अप्रशिक्षित चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए मजबूर हैं ऐसे में आवश्यक है कि गांव में ऐसी चिकित्सा पद्घति का तंत्र विकसित किया जाये जो अपेक्षाकृत कम खर्चीला हो, जिसका शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न हों और रोग को जड़ से ठीक करता हो ऐसी चिकित्सा होम्योपैथी के अतिरिक्त और कोई नहीं हीे सकती है।
अभी तक जहां होम्योपैथी केवल बड़े शहरों में अपनाई जा रही थी आज देश के छोटे छोटे कस्बों एवं गांवों में भी लोकप्रियता अर्जित कर रही हैं। इसका कारण है कि एक सर्वेक्षण में 75त्न रोगीयों ने स्वीकार किया है कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्घति रोग को जड़ से समाप्त करने की क्षमता सरल प्रयोग करने में आसान सुरक्षित उपचार एवं शरीर पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव न उत्पन्न करने के गुण के कारण लोकप्रिय होती जा रही है। कुछ आपात स्थितियों को छोड़ कर होम्योपैथी ही लगभग 80 त्नरोगों के उपचार के लिए कारगर उपाय है

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