दूसरे राज्यों से मजदूरों को लाने में भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि श्रमिक संकट निपटाने में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार विफल रही है। लाॅकडाउन में सरकार के जबानी आदेशों के बावजूद लोगों की आजीविका का भी संकट है।

रविवार को जारी बयान में यादव ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के चलते गहराए बेरोजगारी संकट का समाधान करने की बजाय सरकार का रवैया टालने जैसा दिखता है। भाजपा सरकार कोरोना संकट से बने हालात का न सही आंकलन कर रही है और न ही समाधान के सही रास्ते दिखाने में सक्षम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अति निम्न वर्ग के गरीबों को कोई पूछने वाला नहीं है। वे भुखमरी झेल रहे है और जनाक्रोश के डर से भाजपा कार्यकर्ता मारे शर्म मुंह छिपाए बैठे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की राज्य सरकार की टीम इलेवन ने श्रमिकों को मनरेगा और गांव के दूसरे उद्योगों में खपाने का जो निर्णय लिया है वह पूर्णतया अव्यवहारिक है। उससे प्रदेश में असंतोष और आक्रोश बढ़ेगा। पहले से ही यहां संगठित क्षेत्रों में छंटनी और असंगठित क्षेत्रों में नौकरी के अभाव से बेरोजगारी चरम पर है। जब बेरोजगारी झेल रहे नौजवानों को न तो नौकरी न ही बेकारी भत्ता मिल पा रहा है तो दूसरे राज्यों एवं उत्तर प्रदेश के महानगरों में रोजगार के लिए भटक रहे गांवों के करोड़ों बेरोजगार नौजवानों को कहां से रोजगार में खपाया जा सकेगा? भाजपा की यह जुमलेबाजी इस बार बहुत भारी पड़ेगी।

वित्तविहीन शिक्षकों की सुध ले सरकार

अखिलेश यादव ने कहा कि लॉकडाउन के चलते पढ़ाई स्थगित है। इस अवधि में राज्य के लाखों वित्तविहीन शिक्षक भी घर में बैठकर लाॅकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं, उनके सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ऐसेे में वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के सामने वेतन का संकट गंभीर हो गया है। वित्तविहीन शिक्षकों का एक-एक दिन चुनौतीपूर्ण हो गया है। इनके परिवार के भरण-पोषण का संकट आ गया है। सरकार ने इसकी कोई व्यवस्था अभी नहीं की है। सरकार को मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए वित्तविहीन शिक्षकों को समय से वेतन दिलाने का प्रबंध करना चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा है कि नौकरी पेशा लोगों, शिक्षकों तथा भूखे-प्यासे लाचार श्रमिकों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार को भेदभाव नहीं करना

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