लेकिन प्रेम मंदिर के वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनका अहसास भी चारो ओर है। 25 फरवरी को प्रेम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ पर मंदिर के वातावरण कृष्णमय हो गया है। मंगलवार को दिन भर भजन व सत्संग चला तो सायं छ बजे से रात्रि आठ बजे तक रासलीला का आयोजन हुआ। प्रेम मंदिर की दूसरी सालगिरह पर भव्य आयोजन ने देश विदेश से आए भक्तों को भावविभोर कर दिया। प्रेम एक शब्द ही नहीं बल्कि अहसास है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। प्रेम के बिना जीवन की कल्पना भी तो नहीं की जा सकती। प्रेम एक शक्ति है जिसके बलबूते कठिन कठिन से काम हो जाते हैं। प्रेम के सहारे भक्त भगवान को अपने वश में कर लेता है। भारतीय दर्शन शास्त्र में कई सूफी और संतों ने प्रेम के जरिए ही भक्ति का वह मार्ग तय किया जिस पर चलकर उन्हें प्रभु के दर्शन हुए। भगवान कृष्ण की लीलाओं में खोकर रोने वाले चैतन्य महाप्रभु हो या फिर मुस्लिम होते हुए भी वृंदावन को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले कृष्ण भक्त रसखान या फिर कृष्ण की सबसे बड़ी पुजारी मीरा। इन कृष्ण भक्तों में प्रेम का वह स्वरूप था जिससे यह भक्तों के सिरमौर बने। प्रेम जीवन का सार तो है ही भक्तों को भगवान से मिलाने का सबसे बड़ा जरिया भी। धर्म ग्रंथों की इसी मान्यता को साकार करता है वृंदावन में बना प्रेम मंदिर।
ग्यारह साल में 100 करोड़ की लागत से बने कृपालु महाराज के ष्प्रेम मंदिरष् दरवाजे जब फरवरी 2012 खुले तो भक्त घंटों उसे निहारते रहे और इस भव्य मंदिर के कण कण में प्रभु की छवि तलाशने लगे। वृंदावन में बना यह प्रेम मंदिर भगवान कृष्ण व राधा के अदभुत प्रेम को दर्शाता है। इस भव्य मंदिर में इटालियन करारा संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। जगदगुरू कृपालु परिषद श्यामा श्याम धाम प्रेम मंदिर के प्रचारक स्वामी मुकुंदानंद ने बताया कि भगवान कृष्ण व राधा के इस प्रेम मंदिर का शिलान्यास 14 जनवरी 2001 को कृपालु जी महाराज ने लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में किया था। उसी दिन से राजस्थान व उत्तर प्रदेश के एक हजार शिल्पकार अपने साथ हजारों सहयोगी मजदूरों के साथ इस मंदिर के निर्माण कार्य में लग गएण् ग्यारह साल के कठोर श्रम के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मंदिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है। वृदांवन के चटिकारा मार्ग पर स्थित यह अद्वितीय मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुन जागृत होने का संकेत देता है और कृपालु महाराज का इस कृष्ण नगरी को यह एक उपहार हैण् उन्होंने बताया कि वृदांवन में बना यह भव्य मंदिर 54 एकड़ में बना है तथा इसकी ऊंचाई 125 फुटए लंबाई 122 फुट तथा चौड़ाई 115 फुट हैण् इसमें खूबसूरत फव्वारेए राधा कृष्ण की मनोहर झांकिया श्री गोवर्धनधारण लीलाए कालिया नाग दमन लीलाए झूलन लीला की झांकियां खूबसूरत उद्यानों के बीच सजाई गयी है प्रेम मंदिर वास्तुकला के माध्यम से दिव्य प्रेम को सम्पूर्ण आकार देता है। वर्णए जाति देश आदि का भेद मिटाकर संपूर्ण विश्व को दिव्य प्रेम आनंद मंदिर में आमंत्रित करने के लिए इस मंदिर के द्वार सभी दिशाओं में खुलते हैं। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वारों पर अष्ठ मयूरों के नक्काशीदार तोरण बनाए गए हैं तथा पूरे मंदिर की बाहरी दीवारों पर राधाकृष्ण की लीलाओं को शिल्पांकित किया गया है। यहां आने के बाद फिर जाने को दिन ही नहीं करता। इसी प्रकार मंदिर की भीतरी दीवारों पर राधाकृष्ण और कृपालु महाराज की विविध झांकियों को प्रस्तुत किया गया है। मंदिर में 94 स्तंभ हैं जो राधाकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाए गए हैं। उन्होंने बताया कि गर्भगृह के बाहर और अंदर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट पच्चीकारी और नक्काशी की गई है। संगमरमर की प्लेटों पर राधा गोविंद गीत सरल भाषा में उकेरे गए हैं।premmandir

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