लखनऊ में 12 जनवरी, 2014 को स्वामी विवेकानंद जयंती पर साइकिल यात्रा निकालने के बाद मैं 12 फरवरी को केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम से साइकिल द्वारा 100 किमी की यात्रा करके कन्याकुमारी पहुंचा और यह महसूस करने की कोशिश की कि कितने कष्ट उठाकर वो कन्याकुमारी पहुंचे होंगे। मेरे पीछे ये वही विवेकानंद चट्टान है जिस पर शिकागो में होने वाली विश्व धर्म संसद में हिस्सा लेने से पहले 25, 26, 27 दिसम्बर, 1892 को तीन दिन तक विवेकानंद ने ध्यान किया था…। मैंने भी वहां तीन दिन तक ध्यान किया और अपने अंदर काफी अदभुत परिवर्तन महसूस किया…सोचा..अपने एहसास को आप लोगों से शेयर करूं…tara 2

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  1. tarapatkar 26/02/2014

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