लॉकडाउन का दूसरा चरण पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त होगा। इस दौरान राज्यों के बजाय जिलों पर फोकस किया जाएगा। लॉकडाउन की सख्ती बरकरार रहेगी साथ ही हॉट स्पॉट्स को सील कर प्रभावितों की जांच पर भी जोर रहेगा। विशेषज्ञों ने इस अवधि को संक्रमण के तीसरे चरण में पंहुचने से रोकने के लिए अहम माना है। देश के आर्थिक हालात इतने अच्छे भी नहीं हैं कि लंबे समय तक लॉकडाउन को बनाए रखा जाए। इसलिए सरकार ने रणनीति में भी बदलाव किया है। बुधवार को इस बारे में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

दरअसल, लॉकडाउन के पहले चरण में शहरों से गांव की तरफ से पलायन और मरकज के जमातियों से हालात इतने बिगड़े कि अभी तक उन पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।

सूत्रों का कहना है कि इन 15 दिनों में सख्ती ज्यादा रहेगी। हॉट स्पॉट की संख्या बढ़ेगी और कई इलाके पूरी तरह सील होंगे। 20 अप्रैल के बाद जिस तरह की सशर्त राहत देने की बात कही गई है, वह लोगों को मानसिक रूप से राहत देने और सरकार की अपनी रणनीति पर काम के लिए है।

केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों का प्रभावी ढंग से काम शुरू होने से अब जिला स्तर तक पैनी नजर रखी जा रही है। केंद्र का कहना है कि सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों से मिलने वाली रिपोर्ट के बाद ही 20 अप्रैल के बाद कहां छूट देनी है, कहां नहीं- यह फैसला किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि 20 अप्रैल तक हर कस्बे, जिले और राज्य को परखा जाएगा। इस दौरान राज्यों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने जिलों की सीमाओं को सील करने के साथ चौकसी बरतें। जिन जिलों में अभी कोई मरीज नहीं मिला है, वहां न तो किसी को आने दिया जाए न ही वहां से किसी को बाहर जाने दिया जाए

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