लॉकडाउन ने लघु और मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए ) के सर्वे में साफ हुआ है कि यदि लॉकडाउन बढ़ा तो सिर्फ 16.6 फीसदी उद्यमी ही कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में होंगे। उद्योग जगत लॉकडाउन में मिली सरकारी और बैंकिंग सहायता से भी संतुष्ट नहीं है। आईआईए ने बड़े आर्थिक पैकेज की मांग की है। इस सर्वे से यह बात निकल कर आई है कि निजी उद्योगों और फैक्टरिेयों में काम काने वाले श्रमिकों को अप्रैल माह में वेतन के लाले पड़ सकते है। आईआईए ने प्रदेश के लगभग 500 उद्यमियों के बीच ऑनलाइन सर्वे किया है। सर्वे के माध्यम से लॉकडाउन के प्रभाव व भविष्य की परिस्थितियों का आंकलन किया गया। सभी कारोबारियों से 12-12 सवाल पूछे गए थे।

सर्वे का जो परिणाम निकल कर आया है वह कारोबारियों की परेशानियों को स्पष्ट कर रहा है। लॉकडाउन के बाद ज्यादातर फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप है। आईआईए के महासचिव मनमोहन अग्रवाल बताते हैं कि 12 बिन्दुओं पर सर्वे के अनुसार लगभग 68.6 फीसदी उद्योगपतियों ने कहा कि वह मार्च महीने में श्रमिकों को वेतन देने के लिए तैयार हैं। लेकिन 31.4 फीसदी उद्योगपतियों ने कहा कि मजबूरी में उन्हें श्रमिकों को वेतन देना होगा। यदि लॉकडाउन बढ़ता है तो 83.4 प्रतिशत कारोबरियों ने अप्रैल महीने का वेतन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। सिर्फ 16.6 फीसदी ने ही इसे लेकर हामी भरी है। कारोबारी बैंकों से मिल रही मदद से भी बेहद नाखुश हैं। सिर्फ 28 फीसदी ने यह माना है कि बैंक वर्किंग कैपिटल के स्तर पर उनकी मदद कर रहे हैं। 72 प्रतिशत ने इससे इनकार किया है। 77 प्रतिशत कारोबारियों का मानना है कि लॉकडाउन के बाद सरकार अपने राहत पैकेज को आगे नहीं बढ़ाएगी।

सर्वे में उद्यमियों से उनकी सेल गिरने के विषय में भी सवाल पूछा गया। 59.8 फीसदी कारोबारियों ने 20 से 50 फीसदी तक सेल घट जाने की संभावना जताई जताई है। 34 फीसदी उद्यमियों का यह मानना है कि उनकी बिक्री 50 फीसदी से ज्यादा कम हो सकती है। 9 फीसदी लोगों ने सिर्फ 10 प्रतिशत तक बिक्री कम होने की संभावना जताई है, जबकि 6 फीसदी लोगों का कहना है कि लॉकडाउन का प्रभाव नहीं पड़ेगा। 40.3 प्रतिशत उद्यमियों ने बड़े घाटे की आशंका जताई है। संगठन के महासचिव मनमोहन अग्रवाल ने बताया कि इस सर्वे के आधार पर एक श्वेतपत्र बनाकर सरकार के सामने रखा जाएगा। सर्वे की बातें शुक्रवार को औद्योगिक विकास प्रमुख सचिव आलोक कुमार के साथ होने वाली वार्ता में रखा जाएगा। इन पर अगर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो 15 दिन में एमएसएमई पूरी तरह से संकटों में घिर जाएगा।

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