कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक आगे आए हैं। करीब 35 वैज्ञानिकों की टीम अलग-अलग शोधकर एंटी कोविड-19 वैक्सीन पर काम कर रही है।

कई शोध सफल रहे तो कुछ में अभी काम जारी है। इसके साथ ही कोरोना फाइटर्स की मुश्किलें आसान करने के कारगर उपाय खोज गए हैं। भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने भी इनकी सराहना की है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना की लड़ाई में वैज्ञानिकों के यह प्रयास रंग लाएंगे।

देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक कानपुर आईआईटी के वैज्ञानिक भी कोरोना से निपटने को नई तकनीक विकसित करने में लगा है। संस्थान बंद होने के बावजूद वैज्ञानिकों की टीम अपने-अपने स्तर पर शोध कर रही है। इसके अलावा वैज्ञानिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और परिशोधन कक्ष बनाने के लिए भी शोध कर रहे हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. अभय करिंदकर ने बताया कि कोविड-19 के इलाज में ये उपकरण भी कारगर साबित होंगे। ऐसे कई अन्य शोध भी चल रहे हैं जिनके सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आएंगे।

पोर्टेबल वेंटिलेटर आसान करेगी मुश्किल
बायो साइंस एवं बायो इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय की टीम ने सस्ता पोर्टेबल वेंटिलेटर विकसित किया है, जो कोविड-19 के गंभीर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उपयोगी साबित हो सकता है। इसे नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बायोलॉजी पुणे टेस्टिंग के लिए भेजा गया है।

सस्ता एन-95 मास्क
प्रो. तरुण गुप्ता व पूर्व छात्र डॉ.संदीप पाटिल ने एन-95 मास्क तैयार करना शुरू कर दिया है, यह मास्क बाजार में बिकने वाले फेसमास्कों से सस्ता व उपयोगी होगा।

कोटिंग पीपीई किट
डॉ. नगमा परवीन ने एक विशेष कोटिंग बनाई है, जिसे किसी पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वूपमेंट) किट या फेसमास्क में लगाकर उसे मेडिकेटेड बनाया जा सकता है।

पॉलीथीन पीपीई किट
डॉ. नितिन गुप्ता ने पैकेजिंग पालीथीन से पीपीई किट की डिजाइन बनाई है। ये छोटे-छोटे कारखानों में भी बन सकती हैं। ये किट कोरोना फाइटर्स के लिए उपयोगी होगी।

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